केरटू मंडी में ‘दोहरी मार’: उठान न होने से गेहूं में आई सीलन, जगह की कमी से 1 अप्रैल से नहीं आई डीएपी-यूरिया, किसान परेशान, मंडी केरटू का हाल: न गेहूं का उठान, न खाद का इंतजाम; डीएम के ‘रविवार’ वाले आदेश से असमंजस

शामली। फसल की बुवाई का समय आ चुका है, लेकिन मंडी समिति केरटू में अव्यवस्थाओं के चलते किसानों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। मंडी में पिछले काफी समय से अनाज का उठान (परिवहन) न होने के कारण गेहूं में सीलन आने लगी है। वहीं, जगह की कमी के चलते पिछले 1 अप्रैल से मंडी समिति में डीएपी और यूरिया की एक भी बोरी नहीं पहुंची है, जिससे किसानों की अगली फसल की बुवाई अधर में लटक गई है।
सड़क से नीचे होने के कारण जलभराव का खतरा
मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों और मंडी प्रशासन की चिंता को और बढ़ा दिया है। मंडी समिति केरटू की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह मुख्य सड़क से काफी नीचे है। इसके चलते बारिश का सारा पानी मंडी परिसर के भीतर घुस जाता है। उठान न होने के कारण खुले में या कम सुरक्षा में रखा अनाज पानी की चपेट में आकर पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है।
“किसी के घर तो खाद नहीं उतार सकते” — एमडी
इस पूरे गतिरोध पर मंडी समिति केरटू के प्रबंध निदेशक (MD) दीपक ने अपनी बेबसी जाहिर की है। उन्होंने कहा:
“जब तक मंडी से पुराने अनाज का उठान ही नहीं हो पा रहा है, तब तक हम नई खाद मंगाकर कहाँ रखेंगे? खाद की खेप को समिति में जगह न होने पर किसी के घर तो नहीं उतारा जा सकता। उठान होना बेहद जरूरी है।”
प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत में विरोधाभास
एक तरफ मंडी में पैर रखने की जगह नहीं है और अनाज खराब हो रहा है, वहीं दूसरी ओर शुक्रवार को जिलाधिकारी (DM) ने आदेश जारी किया है कि किसान रविवार को भी मंडी समितियों में अपना अनाज बेच सकते हैं। इस निर्देश के बाद मंडी में अनाज की आवक और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे संकट और ज्यादा गहरा सकता है।
किसानों ने लगाई जल्द उठान की गुहार
स्थानीय किसानों का कहना है कि वे खाद के लिए पूरी तरह से मंडी समिति पर ही निर्भर हैं। बुवाई का समय निकलता जा रहा है और अगर समय पर डीएपी-यूरिया नहीं मिला तो भारी नुकसान होगा। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अतिशीघ्र केरटू मंडी से अनाज का उठान कराया जाए, ताकि परिसर खाली हो सके और बुवाई के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
रिपोर्ट : सिद्धार्थ भारद्वाज प्रभारी दिल्ली एनसीआर।

