यूआईआईडीबी मे निवेश सुरक्षित, निजीकरण या बिक्री का आरोप निराधार : सुबोध उनियाल
भ्रामक प्रचार से राज्य का विकास को बाधित करना चाहती है कांग्रेस
देहरादून 4 नवंबर। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने यूआईआईडीबी की जमीनों को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाये आरोपों को भ्रामक और अनर्गल बताते हुए सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेश के लिए दी गई जमीनों सौ फीसदी मालिकाना हक सरकार रहेगा। लेकिन कांग्रेस, दिल्ली में बैठे अपने आकाओं के आदेश पर राज्य में विकास और निवेश के माहौल को खराब करने और जनता को गुमराह करने का काम रही है।
उन्होंने कांग्रेस प्रभारी और अन्य कांग्रेस नेताओं द्वारा उत्तराखंड इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा निवेश प्रयोजन हेतु दी गई जमीनों एवं अन्य मुद्दों पर लगाए जा रहे आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने यूआईआईडीबी द्वारा आवंटित भूमि को लेकर स्पष्ट किया कि ऐसी सभी भूमि का स्वामित्व पूर्णतः सरकार के पास सुरक्षित रहेगा। जिसमें समस्त भूमि का स्वामित्व, नियामक नियंत्रण और निर्धारित अवधि पूरी होने पर पुनः राज्य को हस्तांतरित होने के अधिकार 100% सरकार के पास पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। यह अनुबंध संबंधित संस्थाएं एवं इकाइयां को केवल विकास और संचालन का सीमित अधिकार देता है। जिसके तहत निजी निवेशकों को केवल स्वीकृत परियोजनाओं के विकास और संचालन का सीमित अधिकार दिया जाएगा। और सबसे महत्वपूर्ण है कि यह अधिकार भी कड़ी शर्तों, चरणबद्ध विकास, निवेश प्रतिबद्धताओं और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के अधीन होगा।
उन्होंने दावा किया कि सरकार का यह नवाचार राज्य में रोजगार और आर्थिक समृद्धि का नया अध्याय लिखने जा रहा है। इस पारदर्शी प्रक्रिया से केवल आतिथ्य सत्कार क्षेत्र में ही 1,500 से 2,000 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इतना ही नहीं राज्य को 200 से 250 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिससे स्थानीय खरीद, कर राजस्व और पर्यटन को बड़ी मजबूती मिलेगी।
श्री सुबोध उनियाल ने बताया कि यह सब हमारी सरकार द्वारा परिसंपत्ति मुद्रीकरण की राष्ट्रव्यापी स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही किया है। जो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और रेल भूमि विकास प्राधिकरण जैसी शीर्ष संस्थाओं द्वारा अपनाई जाने वाली भारत सरकार की एक स्थापित और सफल नीति है। जो न तो निजीकरण है और न ही परिसंपत्तियों की बिक्री, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति की क्षमता का उपयोग जनहित और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए करने का एक सुव्यवस्थित माध्यम है।
वहीं उन्होंने कांग्रेस के झूठे आरोपों पोल खोलते हुए कहा कि राज्य की सभी परिसंपत्तियां सुरक्षित हैं और विकास योजनाओं में सक्रिय सहभागिता की अहम भूमिका में हैं। वहीं पलटवार किया कि कांग्रेस द्वारा एचएमटी, आईडीपीएल, लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों और उद्यान विभाग के बगीचों की बिक्री का किया जा रहा प्रचार पूरी तरह झूठ का पुलिंदा है। ये सभी परिसंपत्तियां आज भी अपने मूल विभागों के पास ही सुरक्षित हैं। आतिथ्य सत्कार और अन्य विकास कार्यों के लिए चिह्नित भूमि के भूखंड अभी केवल मास्टर प्लानिंग या प्री-फिजिबिलिटी के शुरुआती चरण में हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 5 साल जनता से कटे और दिल्ली दरबार में पड़े रहने वाले इनके नेता चुनाव में दिग्भ्रमित करने के लिए लगातार झूठे आरोप और प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हमेशा भ्रष्टाचार और निष्क्रिय नियोजित सरकार चलाने वाले विपक्षी नेताओं के लिए विश्वास करना मुश्किल है कि डबल इंजन सरकार में प्रदेश का अभूतपूर्व विकास और जनता का असीम कल्याण हुआ है। उनकी रणनीति है कि किसी भी तरह से भ्रम एवं अफवाह की नकारत्मक राजनीति से सच्चाई को झुठलाया जाए। प्रदेश के विकास कार्यों को बाधित किया जाए और राज्य की छवि खराब कर निराशा का माहौल बनाया जाए। प्रदेश की जनता देख रही है कि कांग्रेस सिर्फ चुनावी लाभ लेने के लिए राज्य का किसी भी कीमत पर नुकसान करने पर उतारू है।
कांग्रेस की विरोधवादी राजनीति उत्तराखंड के युवाओं के रोजगार और भविष्य के रास्ते में बाधा बन रही है। प्रदेश पलायन और सीमित रोजगार अवसरों की चुनौती से जूझ रहा है। ऐसे में बंद औद्योगिक इकाइयों, खाली परिसरों और अनुपयोगी जमीनों का इस्तेमाल विकास के लिए जरूरी है। कांग्रेस के पास न निवेश का रोडमैप है और न रोजगार सृजन की कोई स्पष्ट रणनीति। पहाड़ का युवा पलायन करता रहे और प्रदेश की संपदा अनुपयोगी पड़ी रहे, क्या कांग्रेस इसी व्यवस्था को बनाए रखना चाहती है? निवेश का विरोध करके कांग्रेस वास्तव में स्थानीय युवाओं और छोटे कारोबारियों के आर्थिक अवसरों पर प्रहार कर रही है। औद्योगिक एवं पर्यटन परियोजनाओं से मजदूरों, ठेकेदारों, टैक्सी संचालकों, होटल व्यवसायियों, दुकानदारों, किसानों और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को काम मिलता है। निवेश का लाभ गांवों और स्थानीय परिवारों तक पहुंचता है। कांग्रेस को समझना होगा कि हर विकास परियोजना को विवाद में बदलना स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने जैसा है। उत्तराखंड को विरोध की राजनीति नहीं, अवसर पैदा करने वाली नीति चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का ‘भूमि बचाओ’ अभियान भूमि संरक्षण की मुहिम नहीं, बल्कि अपनी डूबती राजनीतिक जमीन बचाने की छटपटाहट है। जिस कांग्रेस ने अपने शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट की, आज वही भूमि संरक्षण का झूठा चैंपियन बनने का ढोंग कर रही है। अपने कार्यकाल में जमीनों के आवंटन पर उठे सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस आज जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रही है। कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल में हुई जमीनों की बंदरबांट का हिसाब देना चाहिए, फिर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक साहस दिखाना चाहिए।
कांग्रेस पार्टी को पहले नानीसार प्रकरण जमीनों के आवंटन का हिसाब देना चाहिए, बताना चाहिए कि क्यों धौलास भूमि विवाद में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए कोडियो के दाम भूमि दी गई। इसी तरह सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं को जमीन आवंटन के मामले में कांग्रेस की अपनी ही सरकार की जांच आज तक सवालों के घेरे में है। टाटा मोटर्स-सिडकुल भूमि आवंटन के मामले में कांग्रेस की दोहरी राजनीति पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है। इसी तरह वर्ष 2015 में विकासनगर, कालसी, बाजपुर में नदी तटबंध की जमीन और खनन कारोबार पर कांग्रेस का मौन उसके भूमि संरक्षण अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल है। एनएच-74 प्रकरण में मुआवजे की बंदरबांट कांग्रेस के शासनकाल की जवाबदेही से बचने नहीं देगा। वहीं सिडकुल की कथित 500 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं कांग्रेस के औद्योगिक विकास के दावों की परीक्षा हैं।
जबकि धामी सरकार की नीति सरकारी जमीन बेचने की नहीं, सरकारी स्वामित्व सुरक्षित रखते हुए उसका सदुपयोग करने की है। भाजपा सरकार जमीन की सुरक्षा के साथ उससे रोजगार और आर्थिक समृद्धि पैदा करने की नीति पर काम कर रही है।कांग्रेस को भूमि संरक्षण का राजनीतिक तमाशा करने के बजाय धामी सरकार की कब्जामुक्ति कार्रवाई का संज्ञान लेना चाहिए। सरकारी रणनीति के अनुसार प्रदेश में लगभग 13,000 एकड़ सरकारी जमीन अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और व्यवस्थित भूमि प्रबंधन की दिशा में भी काम हुआ है। वास्तविक भूमि संरक्षण प्रशासनिक इच्छाशक्ति से होता है, केवल पोस्टर और नारों से नहीं। धामी सरकार ने कार्रवाई की है, कांग्रेस केवल राजनीतिक शोर मचा रही है।
उन्होंने प्रदेश की जनता से भी कांग्रेस के इस भ्रामक और विकास-विरोधी प्रचार के प्रति सजग और सतर्क रहने की अपील की है। वहीं विश्वास दिलाया कि भाजपा सरकार राज्य के हितों की रक्षा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध होकर निर्णय ले रही है।