विरासत साधना के मंच पर कथक, भरतनाट्यम और गढ़वाली लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुतियां
विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने बिखेरा हुनर, लतिका फाउंडेशन के दिव्यांग बच्चों की प्रस्तुति ने मोहा मन
देहरादून,
27 अक्टूबर। रिच संस्था की ओर से नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित विरासत महोत्सव-2026 के अंतर्गत मंगलवार को ‘विरासत साधना’ कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य परंपराओं के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति की आकर्षक झलक देखने को मिली। सुसज्जित मंच पर विभिन्न विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और कला कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कथक और भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता, भावपूर्ण अभिव्यक्ति, अनुशासन और कलात्मक समृद्धि देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति युवा पीढ़ी की रुचि और समर्पण को भी प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम में द टोंस ब्रिज स्कूल, चरण होली चाइल्ड स्कूल, गुरु स्मृति संगीत शिक्षा केंद्र, डीडीएन, पीवाईडीएस लर्निंग अकादमी, सेंट पैट्रिक एकेडमी, ऐन मेरी स्कूल, दून विश्वविद्यालय, समर वैली स्कूल, आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय, झंकार नृत्य केंद्र, माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, सुरेंद्र संगीत विद्यालय समिति, हेरिटेज नॉर्थ कैंपस, नृत्य किंकिनी स्कूल ऑफ भरतनाट्यम डांस, आईटी चिल्ड्रन्स अकादमी, एडु विला इंस्टीट्यूट, दून प्रेसीडेंसी स्कूल, द ओबेरॉय स्कूल ऑफ इंटीग्रेटेड स्टडीज़, दून ब्लॉसम्स स्कूल और दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण लतिका फाउंडेशन से जुड़े दिव्यांग बच्चों की गढ़वाली लोकनृत्य प्रस्तुति रही। समूह ने पारंपरिक लोकनृत्य के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को खूबसूरती से मंच पर उतारा। प्रस्तुति में आदित्य पुंडीर, आशीष चार्ल्स, स्वयं सिंह, श्रुति पांडे, आस्था शर्मा, कश्वी, मयंक तथा कला ने भाग लिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में समावेशिता, समान अवसर और दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
कथक एवं भरतनाट्यम की शास्त्रीय प्रस्तुतियों के साथ गढ़वाली लोकनृत्य के समावेश ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। ‘विरासत साधना’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास विकसित करने और देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता और लतिका फाउंडेशन के बच्चों की प्रस्तुति ने कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में सबको साथ लेकर चलने के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं, उत्तराखंड की लोक संस्कृति और समावेशी सहभागिता को एक मंच पर लाकर विरासत महोत्सव-2026 की सांस्कृतिक विविधता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।