उत्तराखण्डधरना प्रदर्शन

जल जीवन मिशन के ठेकेदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, भुगतान नहीं मिला तो पूरे प्रदेश में बंद कर देंगे पानी की परियोजनाएं

लंबित भुगतान, सिक्योरिटी राशि और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की मांग; मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग

देहरादून, 13 अक्टूबर। जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का भुगतान लंबे समय से लंबित होने से नाराज देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के ठेकेदारों ने मंगलवार को इंदिरा रोड स्थित एसडब्ल्यूएसएम (राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन) कार्यालय में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। ठेकेदारों ने शासन और विभाग पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए लंबित भुगतान तत्काल जारी करने तथा अन्य समस्याओं के समाधान की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में जल जीवन मिशन की परियोजनाओं का काम और पानी की आपूर्ति बंद करने जैसा कड़ा कदम उठाया जा सकता है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत कार्य करने वाले ठेकेदार वर्षों से अपने वैध भुगतानों, सिक्योरिटी राशि और रोकी गई धनराशि के लिए परेशान हैं। लगातार बैठकों, पत्राचार और आश्वासनों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों ने अपनी पूंजी, बैंक ऋण, संसाधन और श्रम लगाकर दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पेयजल योजनाओं का निर्माण किया, लेकिन भुगतान नहीं मिलने के कारण अब उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अमित अग्रवाल ने कहा कि बैंक ऋण पर बढ़ता ब्याज, आपूर्तिकर्ताओं की बकाया राशि, मजदूरों के पारिश्रमिक और अन्य खर्चों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ठेकेदारों के लिए आगे काम जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन अब केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं करेगा और मांगों पर लिखित निर्णय चाहता है।
आज शाम तक आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि मंगलवार शाम तक उनकी मांगों पर शासन स्तर पर विचार नहीं किया गया और मुख्यमंत्री तथा संबंधित सचिव की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो बुधवार से प्रदेशभर के जल जीवन मिशन के ठेकेदार परियोजनाओं में पानी की आपूर्ति बंद करने का कदम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि अपने संविदात्मक अधिकारों और वैध भुगतानों को सुनिश्चित कराना है।
वहीं, पिथौरागढ़ से धरने में शामिल होने पहुंचे ठेकेदार ललित कन्याल ने कहा कि भुगतान न होने से ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह यहीं भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को ठेकेदारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
ठेकेदारों की छह प्रमुख मांगें
एसोसिएशन की ओर से शासन को सौंपे गए ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। इनमें जल जीवन मिशन के अंतर्गत निष्पादित एवं विभाग द्वारा मापे गए कार्यों के लंबित बिलों, अंतिम भुगतान, सिक्योरिटी डिपॉजिट, रोकी गई धनराशि तथा टीपीआई और टेस्टिंग से संबंधित देयकों का भुगतान निर्धारित समयसीमा में करने की मांग शामिल है।
संगठन ने ठेकेदारों के विरुद्ध की जा रही ब्लैकलिस्टिंग, रिकवरी, रिस्क एंड कॉस्ट और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि जिन योजनाओं में धनराशि उपलब्ध न होने अथवा विभागीय कारणों से देरी हुई है, उनमें ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। ऐसी योजनाओं की निष्पक्ष समीक्षा कर बिना अर्थदंड के समय विस्तार दिया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त भुगतान प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने, बिलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक स्तर पर अधिकतम समयसीमा तय करने तथा अनावश्यक देरी के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में सभी योजनाओं में रोकी गई धनराशि, सिक्योरिटी और अन्य वैध कटौतियों का तत्काल निस्तारण करने की भी मांग की गई है। संगठन ने कहा कि थर्ड पार्टी द्वारा योजना पूर्ण घोषित किए जाने के बाद उससे संबंधित कारणों के आधार पर ठेकेदारों का भुगतान नहीं रोका जाना चाहिए। सामुदायिक अंशदान की वसूली का दायित्व ठेकेदारों पर डालकर उनके भुगतान को लंबित रखना भी उचित नहीं है।
एसोसिएशन ने रेट्रोफिटिंग, एमवीएस और एसवीएस जैसी योजना श्रेणियों के आधार पर भुगतान में भेदभाव न करने तथा सभी योजनाओं के लिए समान नियम और प्रक्रिया अपनाने की मांग भी उठाई है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक बुलाने की मांग
संगठन ने जल जीवन मिशन से संबंधित सभी लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है। बैठक में पेयजल सचिव, मिशन निदेशक, उत्तराखंड पेयजल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदार संगठन के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई है। संगठन चाहता है कि बैठक में प्रत्येक समस्या के समाधान की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और लिए गए निर्णयों का लिखित कार्यवृत्त उपलब्ध कराया जाए।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस निर्णय और लंबित भुगतान जारी करने की समयबद्ध कार्ययोजना लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन, कार्यबंदी और अनिश्चितकालीन आंदोलन तेज करेगा। संगठन का कहना है कि भुगतान में देरी से न केवल ठेकेदारों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है, बल्कि पेयजल योजनाओं के निर्माण, संचालन और रखरखाव पर भी असर पड़ सकता है।
धरना दे रहे ठेकेदारों ने कहा कि वे सरकार के साथ मिलकर ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को पूरा करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए उनके वैध भुगतान और संविदात्मक अधिकारों का सम्मान किया जाना आवश्यक है।
धरना-प्रदर्शन में एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल, उपाध्यक्ष सचिन मित्तल, महासचिव सुनील गुप्ता, बृजमोहन, गौरव गोयल, अंकित सलार, भरत सिंह पवार, ललित कन्याल, जीता राम सैनी, गोविंद सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह, मोहित पवार, रजत सिंघल, जेपी अग्रवाल, केशव सिंह, राजेंद्र, सुनील जोशी, जगजीत सिंह सहित अन्य ठेकेदार मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button