काशीपुर से शुरू हुई ‘महक क्रांति’ की नई पहल, 22,750 हेक्टेयर में विकसित होंगी 7 एरोमा वैली : गणेश जोशी
कृषि मंत्री ने महक प्रचार रथ को दिखाई हरी झंडी, मिंट की वैज्ञानिक खेती को गांव-गांव पहुंचाने का अभियान शुरू
काशीपुर,

04 अक्टूबर। प्रदेश में सगन्ध फसलों की खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से उत्तराखण्ड सरकार ने ‘महक क्रांति नीति 2026-2036’ के तहत अभियान की शुरुआत कर दी है। रविवार को काशीपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों को कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत चेक वितरित किए और मिंट की खेती के प्रचार-प्रसार के लिए महक प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
सगन्ध पौधा केन्द्र, परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (पारडी) की ओर से आयोजित कृषक गोष्ठी में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य में सगन्ध खेती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए महक क्रांति नीति लागू की गई है। नीति के प्रथम चरण में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 22,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सात एरोमा वैली विकसित की जाएंगी, जिससे लगभग 91 हजार किसान लाभान्वित होंगे।
सात एरोमा वैली से बढ़ेगा सगन्ध खेती का दायरा
कृषि मंत्री ने बताया कि नीति के तहत डैमस्क रोज वैली चमोली एवं अल्मोड़ा, तिमूर वैली पिथौरागढ़, मिंट वैली ऊधमसिंह नगर, सिनेमन वैली चंपावत एवं नैनीताल, लेमनग्रास-मिंट वैली हरिद्वार तथा लेमनग्रास वैली पौड़ी में विकसित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि महक क्रांति नीति की शुरुआत ऊधमसिंह नगर जिले में मिंट की खेती से की जा रही है। जिले में 8,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मिंट वैली विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे करीब 32 हजार किसान लाभान्वित होंगे। चालू वित्तीय वर्ष में 300 हेक्टेयर भूमि पर मिंट की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
29,921 किसान पहले से कर रहे सगन्ध फसलों की खेती
गणेश जोशी ने कहा कि पारडी संस्थान की स्थापना के बाद वर्ष 2003 से अब तक राज्य के 109 एरोमा क्लस्टरों में 29,921 किसान करीब 9,866 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लेमनग्रास, डैमस्क रोज, मिंट, सिनेमन सहित विभिन्न सगन्ध फसलों की खेती कर रहे हैं। किसानों को खेतों के समीप ही प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न क्लस्टरों में 200 आसवन संयंत्र लघु उद्यम के रूप में संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में सगन्ध क्षेत्र का कारोबार अब 120 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में मिली सफलता को देखते हुए सरकार ने सगन्ध फसलों के बड़े स्तर पर कृषिकरण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए महक क्रांति नीति 2026-36 लागू की है।
उत्पादन से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन से जुड़ेंगे किसान
कृषि मंत्री ने कहा कि महक क्रांति नीति का उद्देश्य केवल सगन्ध फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन से जोड़ना है। सरकार का प्रयास है कि किसानों की खेती की लागत कम हो, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़े, उन्हें बेहतर मूल्य मिले तथा फसल जोखिम कम करते हुए उनकी आय में वास्तविक वृद्धि हो।
उन्होंने कहा कि महक प्रचार वाहनों के माध्यम से गांव-गांव और किसान-किसान तक मिंट की वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन, आसवन, गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाएगी। उन्होंने मिंट किसानों से पारडी संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जा रही वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने और विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लेने का आह्वान किया।
काशीपुर का एरोमा पार्क बनेगा सगन्ध उद्योग का प्रमुख केंद्र
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि काशीपुर का एरोमा पार्क भी सरकार की इसी व्यापक सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि मिंट सहित सभी सगन्ध फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो और किसानों को उद्योग तथा बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि मेन्था प्रोसेसिंग की एक बड़ी यूनिट एरोमा पार्क, काशीपुर में प्रारंभ हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि मिंट केवल एक फसल तक सीमित न रहे, बल्कि यह किसानों की आय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बने। महक प्रचार रथ का यह अभियान इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, राज्यमंत्री अनुराधा वालिया, सचिव कृषि एस.एन. पांडेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, निदेशक पारडी संस्थान डॉ. नृपेन्द्र चौहान, निदेशक कृषि दिनेश कुमार, निदेशक उद्यान आर.के. सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।