पराली से बनेगा सड़क निर्माण का ‘ग्रीन बिटुमेन’, पेट्रोलियम पर निर्भरता होगी कम
सीएसआईआर-आईआईपी, सीआरआरआई और एएमपीआरआई ने स्वदेशी बायो-बाइंडर तकनीक का किया प्रदर्शन; मार्च 2027 तक बनेगी राष्ट्रीय बायो-बाइंडर परीक्षण प्रयोगशाला
देहरादून, 4 अगस्त। कृषि एवं बायोमास अपशिष्ट अब सड़क निर्माण में पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी), देहरादून ने सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और सीएसआईआर-उन्नत सामग्री एवं प्रक्रिया अनुसंधान संस्थान (एएमपीआरआई) के सहयोग से स्वदेशी बायो-बाइंडर तकनीक का प्रदर्शन किया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह तकनीक कृषि अवशेषों, विशेषकर धान की पराली और अन्य बायोमास अपशिष्ट को उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर सकती है।
प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अनुसंधान सहयोगियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित इस हरित तकनीक को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाना और देश में सतत सड़क अवसंरचना के विकास को गति देना रहा।
पराली से बायो-बाइंडर तक का सफर
सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि बायो-बाइंडर तकनीक कृषि एवं बायोमास अपशिष्ट को पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि तीनों सीएसआईआर संस्थानों के संयुक्त प्रयास से विकसित यह तकनीक आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने के साथ कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग, किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर और हरित अवसंरचना को बढ़ावा देने में सहायक होगी।
सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. सी. रवि शेखर ने बताया कि बायोमास को पाइरोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से बायो-ऑयल, बायो-बाइंडर, बायोचार और बायोगैस जैसे उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। इनमें तैयार बायो-बाइंडर सड़क निर्माण में पारंपरिक पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन के विकल्प अथवा पूरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
शिलांग में 100 मीटर सड़क खंड का सफल परीक्षण
डॉ. रवि शेखर के मुताबिक सीएसआईआर-सीआरआरआई ने शिलांग के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-40 पर निर्मित 100 मीटर लंबे बायो-बाइंडर परीक्षण खंड का दीर्घकालिक मूल्यांकन सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने बायो-बाइंडर आधारित सड़क निर्माण के लिए पांच किलोमीटर लंबे मूल्यांकन कार्यक्रम की शुरुआत की है।
उन्होंने कहा कि इस तकनीक के देशव्यापी उपयोग के लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई और भारतीय सड़क कांग्रेस के साथ मिलकर तकनीकी मानक और कार्यान्वयन दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है।
मार्च 2027 तक राष्ट्रीय परीक्षण प्रयोगशाला
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सीएसआईआर-सीआरआरआई में राष्ट्रीय बायो-बाइंडर परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसका संचालन मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रयोगशाला में व्यावसायिक स्तर पर तैयार बायो-बाइंडरों के परीक्षण, प्रमाणीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और सत्यापन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे देश में बायो-बाइंडर के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
जीरो-वेस्ट बायो-रिफाइनरी की दिशा में कदम
सीएसआईआर-एएमपीआरआई के निदेशक डॉ. थल्लाडा भास्कर ने कहा कि तकनीक को केवल बायो-बाइंडर उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे शून्य-अपशिष्ट जैव-रिफाइनरी मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। इसमें बायोमास की प्रत्येक प्रक्रिया धारा से अधिकतम व्यावसायिक मूल्य प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
बायोमास पाइरोलिसिस से प्राप्त भारी कार्बनिक अंश का उपयोग बायो-बाइंडर बनाने में किया जाता है, जबकि जलीय अंश से पेटेंट प्राप्त जैविक कीटनाशक विकसित किया गया है। इसे भंडारण और परिवहन में सुविधा के लिए स्थायी पाउडर रूप में भी विकसित किया गया है।
आत्मनिर्भर भारत और सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बल
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक एक साथ कई मोर्चों पर लाभकारी साबित हो सकती है। इससे जहां सड़क निर्माण में आयातित बिटुमेन पर निर्भरता कम होगी, वहीं कृषि अवशेषों के जलाने से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही पराली एवं अन्य बायोमास को आर्थिक संसाधन में बदलकर किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
सीएसआईआर-आईआईपी, सीआरआरआई और एएमपीआरआई ने संयुक्त रूप से प्रयोगशाला से बाजार तक इस तकनीक को पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत और परिपत्र जैव-अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. ज्योति पोरवाल ने किया। इस अवसर पर आरपीपीएम के प्रमुख डॉ. ओ.पी. खत्री, व्यवसाय विकास प्रमुख डॉ. अतुल रंजन, एमआरईडी प्रमुख डॉ. अजय कुमार सहित सीएसआईआर-आईआईपी के अन्य अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

