उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन

नयांगांव रतनपुर में आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने सुनाया उद्धव संवाद और भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का प्रसंग

देहरादून 04 अक्टूबर । नयांगांव रतनपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन के मार्मिक प्रसंग के साथ विधिवत समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन, उद्धव संवाद तथा भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं से मिलने वाली जीवनोपयोगी शिक्षाओं का विस्तार से वर्णन किया।
आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन धर्म, भक्ति, सत्य, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। उन्होंने उद्धव संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य के सुख-दुख का मूल कारण उसका मन है। स्वाधीन मन वाला व्यक्ति सुखी रह ता है, जबकि विषय-वासनाओं के अधीन मनुष्य दुख का अनुभव करता है।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव जी को बदरीकाश्रम जाने की प्रेरणा देते हुए अपनी खड़ाऊँ साथ ले जाने को कहा। भगवान ने समझाया कि बदरीकाश्रम में उन्हें मेरा सान्निध्य प्राप्त होगा। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को मन को सांसारिक विषय-वासनाओं से हटाकर भगवान के चरणों में लगाने का संदेश दिया।
कथा के दौरान भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का भी वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि प्रकृति के विभिन्न तत्वों और जीव-जंतुओं से भी मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण शिक्षाएं ग्रहण कर सकता है। पृथ्वी से धैर्य, जल से पवित्रता, अग्नि से तेज और आकाश से व्यापकता जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा दी गई। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली प्रत्येक परिस्थिति मनुष्य को कुछ न कुछ सीख देती है, आवश्यकता केवल उसे समझने और आत्मसात करने की है।
कथा के समापन अवसर पर पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। इसके पश्चात भव्य भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ कथा का समापन किया।
इस अवसर पर विधायक सहदेव पुंडीर, आचार्य रमेश उनियाल, शशि उनियाल, आचार्य सुरेश उनियाल, आचार्य विनोद उनियाल, सरोजनी उनियाल, रूपेश उनियाल, दामिनी, सुनीता उनियाल, रानी उनियाल, रुद्रांश उनियाल, आचार्य उदय शंकर भट्ट, आचार्य दामोदर सेमवाल, आचार्य दिवाकर भट्ट, रुचि बिजोला, स्वाति गौड़, साक्षी उनियाल, मीना सेमवाल, यामिनी सेमवाल, प्रमा ममगाईं, आशीष सेमवाल, हरीश उनियाल, अनिल चमोली सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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