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नईदिल्ली। परसों 27 जुलाई को पूरे देश में आयोजित हुई AIMS CRE – 5, Group code 58 – SSO परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्रों के भविष्य के साथ एक भद्दा मजाक किया गया है! पूरे देश में सामान्य के लिए मात्र 9 सीटें थीं व सभी के लिए 18 सीटें थी।जिसके लिए अनगिनत होनहार बच्चों ने दिन-रात एक करके तैयारी की थी।लेकिन परीक्षा केंद्र से बाहर आते ही अभिभावकों के पैरों तले जमीन खिसक गई, जब बच्चों ने बताया कि पूरा का पूरा पेपर पूरी तरह से सिलेबस से बाहर (Out of Syllabus) था! एक सबसे बड़ा और अजीब सवाल यह उठता है कि जो बच्चा साइंस (Science) बैकग्राउंड का है, वह परीक्षा में कॉमर्स (Commerce) का पेपर कैसे हल कर सकता है? क्या सरकार और परीक्षा बोर्ड को इतनी बुनियादी समझ भी नहीं है?जब सीटें सिर्फ 18 थीं और पेपर का स्तर ऐसा था जो तय पाठ्यक्रम से मेल ही नहीं खाता, तो मन में यह गंभीर संदेह उठना स्वाभाविक है।
क्या ये सीटें पहले ही बेची जा चुकी थीं? अगर सब कुछ पहले से तय था, तो सरकार ने पूरे देश के बच्चों को बुलाकर यह परीक्षा लेने का नाटक क्यों किया?इन बच्चों की मेहनत, इनके माता-पिता के पैसे और इनके सपनों की कीमत इस भ्रष्ट व्यवस्था के लिए कुछ भी नहीं है क्या? हम इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। तीन हजार की फार्म फीस थी। इस परीक्षा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए!शर्मनाक! 😡✍️
ध्यान देने योग्य बात एक और है अन्य पोस्ट के लिए हुए पेपर में भी यही हाल देखा गया। परीक्षार्थी कहते हुए सुने गए कि एक डॉक्टर से पुछा जा रहा है कि ब्रिज कैसे बनेगा सच में ये परीक्षा के नाम पर भद्दा मजाक है।
एक बात और मैं पुरजोर तरीके से कहना चाहता हूं कि मैं छात्रों के आन्दोलन में तो साथ हूं किन्तु असामाजिक तत्वों के पूर्णतः खिलाफ हूं। देश में अराजकता फैलाने वाले या आंदोलन के नाम पर तोड़ फोड़ गुण्डागर्दी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होने के पक्षधर में भी हूं।
रिपोर्ट : सिद्धार्थ भारद्वाज प्रभारी दिल्ली एनसीआर।