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राज्यसभा में डॉ. नरेश बंसल का सवाल: आयुष्मान भारत से 12.69 करोड़ उपचार, 70 वर्ष से अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक भी योजना में शामिल

नई दिल्ली 23 जुलाई । राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने अतारांकित प्रश्न संख्या 293 के माध्यम से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई), आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लिखित उत्तर में बताया कि सितंबर 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत प्रारंभ में सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना-2011 के आधार पर 10.74 करोड़ परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया गया था।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2023 में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार की गई। मार्च 2024 में लगभग 37 लाख आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया। इसके बाद योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना योजना का लाभ दिया गया।
मंत्री ने बताया कि 30 जून 2026 तक देशभर में योजना के तहत 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर 1.92 लाख करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हुआ है।
उन्होंने कहा कि देशभर में 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ कर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उत्तराखंड सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत हुई है।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि सितंबर 2021 में शुरू किए गए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत एबी-पीएमजेएवाई, निक्षय, आरसीएच और एनसीडी जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। वर्तमान में 27 लाख स्वास्थ्य केंद्र एबीडीएम-सक्षम सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं, जिससे आभा (ABHA) हेल्थ अकाउंट के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने और साझा करने की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
सरकार ने एबीडीएम को बढ़ावा देने के लिए मॉडल फैसिलिटी पहल, स्वास्थ्य संस्थानों को प्रोत्साहन, छोटे अस्पतालों के लिए सी-डैक के सहयोग से किफायती एचएमआईएस, जन-जागरूकता अभियान तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) कार्यक्रमों जैसी कई पहलें शुरू की हैं।
जेब से होने वाले स्वास्थ्य खर्च में कमी के संबंध में मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022-23 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय में लोगों की जेब से होने वाला खर्च 2014-15 के 62.6 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 43.4 प्रतिशत रह गया है। यह कमी स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़े सरकारी निवेश और आयुष्मान भारत जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के विस्तार का परिणाम है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों ने अपनी स्वास्थ्य योजनाओं को एबी-पीएमजेएवाई से जोड़कर लाभार्थियों का दायरा और बढ़ाया है। इससे कमजोर एवं वंचित वर्गों तक स्वास्थ्य सुरक्षा की पहुंच मजबूत हुई है तथा सरकार के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है।

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