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उत्तर भारत में पहली बार उत्तराखण्ड में शुरू हुआ ‘भुली’ कार्यक्रम, महिला उद्यमियों को मिलेगा नया कारोबार और वित्तीय सहयोग

देहरादून,14 जुलाई 2026। उत्तराखण्ड राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (यूएसआरएलएम) के तहत ग्रामीण महिला उद्यमिता को नई पहचान देने के उद्देश्य से उत्तर भारत के पहले ग्रामीण उद्यम इन्क्यूबेशन कार्यक्रम ‘भुली’ (BHULI – Business & Handholding Unit for Livelihood Incubation) का शुभारंभ मंगलवार को देहरादून स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट (सीएसआई) में किया गया। इस अवसर पर ‘भुली’ कार्यक्रम के साथ एमआईएस पोर्टल और बुकलेट का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम्य विकास मंत्री श्री भरत सिंह चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि ‘भुली’ उत्तराखण्ड की मातृशक्ति के सपनों को उड़ान देने वाला अभियान है। आईआईएम काशीपुर के सहयोग से अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनेंगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल 150 उद्यमियों से शुरू हो रही इस योजना का भविष्य में पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों को स्कूली बच्चों और पुलिस कर्मियों की वर्दी निर्माण जैसे कार्य सौंपने की दिशा में पहले से प्रयासरत है। साथ ही पशुपालन, डेयरी और अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यूएसआरएलएम सुश्री झरना कमठान ने बताया कि यह योजना आईआईएम काशीपुर के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (FIED) के तकनीकी सहयोग से संचालित की जा रही है। इच्छुक महिला उद्यमी एफआईईडी की वेबसाइट के माध्यम से सीधे आवेदन कर सकेंगी।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत 150 महिला उद्यमियों का चयन व्यक्तिगत, समूह और बड़े उद्यम की श्रेणियों में किया जाएगा। इनमें प्रत्येक श्रेणी से छह-छह उद्यमियों सहित कुल 18 उद्यमियों को अधिकतम 15 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा, जबकि शेष 132 उद्यमियों को औसतन 4 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। चयनित सभी उद्यमियों को 18 माह तक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और व्यवसायिक परामर्श दिया जाएगा, जिससे उनकी आय में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के सचिव श्री धीराज सिंह गब्र्याल ने कहा कि यह तीन वर्षीय महत्वाकांक्षी योजना स्वयं सहायता समूहों के पारंपरिक कौशल को व्यावसायिक और कॉरपोरेट स्वरूप प्रदान करेगी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में समेकित कृषि आधारित मॉडल अपनाने पर भी जोर दिया।
आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रो. नीरज द्विवेदी ने कहा कि ‘भुली’ परियोजना उत्तराखण्ड की महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत मंच साबित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा स्थानीय उत्पादों के स्टॉल भी लगाए, जिनकी अतिथियों ने सराहना की। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला उद्यमियों को सम्मानित भी किया गया।
समारोह में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रदीप कुमार पाण्डेय, आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराधा पाल, एफआईईडी कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सफल बत्रा, यूएसआरएलएम के अधिकारी-कर्मचारी तथा राज्य के सभी 13 जनपदों से बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमी उपस्थित रहीं।

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