देहरादून में अर्बन चैलेंज फंड पर क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन
बैंक योग्य शहरी अवसंरचना परियोजनाओं के विकास एवं वित्तीय संसाधनों के जुटाव पर केंद्रित रही कार्यशाला
• राज्य के नगर आयुक्तों एवं शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया प्रतिभाग
• सतत शहरी विकास हेतु नवाचारी वित्तीय मॉडल, पीपीपी रणनीतियों एवं परियोजना तैयारी पर हुआ विचार-विमर्श
देहरादून 25 जून । 
हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (हुडको) ने शहरी विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से “अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत बैंक योग्य शहरी अवसंरचना एवं वित्तीय संसाधनों के जुटाव” विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में राज्य के विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों के नगर आयुक्तों तथा शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहरी विकास निदेशालय, उत्तराखण्ड शासन के निदेशक श्री विनोद गिरी गोस्वामी ने अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों का प्रभावी उपयोग करने हेतु समेकित एवं बैंक योग्य शहरी अवसंरचना परियोजनाओं के विकास पर बल दिया। उन्होंने नगर आयुक्तों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं अनुभवों का उपयोग करते हुए राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया।
कार्यशाला के दौरान शहरी अवसंरचना एवं वित्त के क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी प्रस्तुतियां दी गईं। हुडको के महाप्रबंधक (परियोजनाएं) डॉ. आर. के. सिंह ने “यूआईविन (UiWIN): अर्बन चैलेंज फंड का एक सक्षम सहयोगी” विषय पर प्रस्तुति देते हुए हुडको की अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) पहल तथा परियोजना तैयारी एवं वित्तीय सहयोग में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
डेलॉइट के निदेशक श्री विकाश चन्द्र ने अर्बन चैलेंज फंड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नवाचारी शहरी वित्तपोषण मॉडलों पर अपने विचार साझा किए तथा विभिन्न वित्तीय संरचनाओं के उदाहरण प्रस्तुत किए, जिन्हें शहरी स्थानीय निकाय संसाधन जुटाने के लिए अपना सकते हैं। शहरी वित्त विशेषज्ञ श्री आलोक शिरोमणि ने शहरी अवसंरचना वित्तपोषण एवं नगर निकाय वित्त व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा करते हुए विशेष रूप से पर्वतीय राज्यों में उपलब्ध चुनौतियों एवं अवसरों को रेखांकित किया। पीपीपी विशेषज्ञ श्री राजीव चड्ढा ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) रणनीतियों एवं परियोजना संरचना से संबंधित विषयों पर व्यावहारिक उदाहरणों सहित विस्तृत प्रस्तुति दी।
उत्तराखण्ड सरकार के शहरी विकास विभाग के श्री रवि पाण्डेय ने “उत्तराखण्ड राज्य हेतु परियोजनाओं की अवधारणा” विषय पर सत्र का संचालन किया। उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट शहरी अवसंरचना आवश्यकताओं की पहचान तथा स्थानीय चुनौतियों के समाधान हेतु परिणामोन्मुख एवं समेकित परियोजनाओं के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों को परियोजना विकास एवं शहरी परिवर्तन के लिए दीर्घकालिक एवं रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के अंतर्गत “परिकल्पना से अर्बन चैलेंज फंड की तैयारी तक : परियोजना तैयारी की रूपरेखा” विषय पर एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें राज्य सरकार के अधिकारियों ने प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया तथा परियोजना पहचान, तैयारी, वित्तपोषण एवं क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न प्रश्नों का समाधान किया।
हुडको देहरादून के क्षेत्रीय प्रमुख श्री संजय भार्गव, उप महाप्रबंधक (परियोजना) श्री अभिजीत सरकार, हुडको के कॉर्पोरेट कार्यालय के अधिकारियों तथा देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने भी कार्यशाला में सहभागिता की तथा इसके सफल आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का समापन हुडको, देहरादून के क्षेत्रीय प्रमुख श्री संजय भार्गव द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागी अधिकारियों, शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, हुडको कॉर्पोरेट कार्यालय, उत्तराखण्ड सरकार के शहरी विकास विभाग तथा सहयोगी संस्थाओं का कार्यशाला की सफलता में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला के दौरान हुए विचार-विमर्श एवं ज्ञान-साझाकरण से उत्तराखण्ड में उच्च गुणवत्ता वाली एवं वित्तीय रूप से व्यवहार्य शहरी अवसंरचना परियोजनाओं के विकास को नई गति मिलेगी तथा राज्य के सतत शहरी विकास एवं परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होगा।



