डेटा समन्वयन से बनेगी सशक्त शासन व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण डेटा से होंगे प्रभावी निर्णय : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन

देहरादून,22 जून। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को चकराता रोड स्थित एक होटल में अर्थ एवं संख्या निदेशालय तथा सी.पी.पी.जी.जी., नियोजन विभाग द्वारा आयोजित ‘Data Harmonization-Building Data Linked Governance System’ विषयक कार्यशाला का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शासन-प्रशासन का मूल्यांकन केवल उसकी मंशा से नहीं, बल्कि उसके परिणामों के आधार पर किया जाता है और इन परिणामों का प्रभावी आकलन गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय डेटा के माध्यम से ही संभव है।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड अपनी भौगोलिक विषमताओं, आपदा संवेदनशीलता, उच्च पलायन दर तथा पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण विशिष्ट विकासात्मक परिस्थितियों का सामना कर रहा है। ऐसे में डेटा हार्मोनाइजेशन (Data Harmonization) केवल आंकड़ों के समन्वय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वानुमान आधारित एवं सक्रिय योजना निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों को डेटा समन्वयन के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इनके प्रभावी उपयोग के लिए डेटा की गुणवत्ता, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि सांख्यिकीय कार्यों से जुड़े अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में चिन्हित कर उनका क्षमता वर्धन किया जाए, ताकि डेटा आधारित शासन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं भारत सरकार के सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव श्री सौरभ गर्ग ने उत्तराखण्ड की सराहना करते हुए कहा कि भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद डेटा हार्मोनाइजेशन विषय पर गंभीरता से पहल करने वाला उत्तराखण्ड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़ों का संधारण और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अधिकतम उपयोग, बेहतर नियोजन और नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार सुश्री अन्ना रॉय ने कहा कि केवल डेटा संग्रह पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका समुचित विश्लेषण और सही व्याख्या भी आवश्यक है। उन्होंने राज्य को नीति आयोग की ओर से आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनकी अध्यक्षता प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव श्री रणजीत सिन्हा तथा श्री बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने की।
समापन सत्र में सी.पी.पी.जी.जी. के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मनोज कुमार पंत ने राज्य की आगामी कार्ययोजना का खाका प्रस्तुत किया तथा सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों, ISB हैदराबाद, IIM अहमदाबाद, J-PAL, वर्ल्ड बैंक एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में निजी क्षेत्र, कॉरपोरेट जगत तथा देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी विभिन्न सत्रों में अपने विचार साझा किए।


