पूर्व सैनिकों को आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने पर रहेगा फोकस: रघुवीर सिंह भण्डारी

देहरादून, 08 जून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के नव नियुक्त उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस अवसर पर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने उनका स्वागत करते हुए नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यभार ग्रहण करने के बाद उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह भण्डारी ने कहा कि उत्तराखण्ड आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। ऐसे में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, सशक्त और जन-केंद्रित बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों एवं अनुभवों का बेहतर उपयोग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य के पूर्व सैनिकों तथा अर्द्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों को आपदा प्रबंधन तंत्र से जोड़ने की होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के अधिकांश गांवों में पूर्व सैनिक मौजूद हैं, जिनका अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, प्रशिक्षण और मैदानी अनुभव आपदा जोखिम न्यूनीकरण, खोज एवं बचाव कार्यों तथा सामुदायिक आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भण्डारी ने कहा कि राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने के लिए कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और पूर्व सैनिकों के समन्वय से प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने का प्रयास भी किया जाएगा।
इस अवसर पर सचिव विनोद कुमार सुमन ने विश्वास जताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल भण्डारी के व्यापक सैन्य, प्रशासनिक एवं संगठनात्मक अनुभव का लाभ राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मिलेगा और उनके मार्गदर्शन में विभिन्न योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेंगी।
उल्लेखनीय है कि लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेनि.) ने भारतीय सेना में लगभग 38 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। उन्होंने थल सेना प्रशिक्षण स्कूल, लद्दाख स्काउट रेजीमेंटल सेंटर लेह, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर लैंसडाउन, मराठा रेजीमेंट तथा नेशनल डिफेंस अकादमी खड़गवासला सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन विजय जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी वे पूर्व सैनिकों के संगठनात्मक सशक्तिकरण और कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। वे उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं तथा वर्तमान में उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक के रूप में योगदान दे रहे हैं।


