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सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर सख्त हुआ प्रशासन, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सभी विभागों को दिए कड़े निर्देश

30 मई तक देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट, 10 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यालयों में बनेगी आंतरिक शिकायत समिति

देहरादून 23 मई। सीडीओ अभिनव शाह ने महिलाओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को सभी विभागाध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में मा० सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए।
सीडीओ अभिनव शाह ने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारी है कि महिला कार्मिकों को सुरक्षित और गरिमामय कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने मातृत्व अधिकारों के तहत धात्री माताओं एवं शिशुओं के हितों को ध्यान में रखते हुए स्तनपान, स्वच्छता तथा आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में निर्देशित किया गया कि तहसील, विकासखंड, ग्राम पंचायत और निकाय स्तर सहित उन सभी कार्यालयों में, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां तत्काल आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन किया जाए। साथ ही कार्यालयों में महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से बचाव, निषेध एवं निवारण संबंधी जागरूकता के लिए बिलबोर्ड लगाए जाएं तथा महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
सीडीओ ने सभी कार्यालयों के शौचालयों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और इंसीनेरेटर स्थापित करने के निर्देश भी दिए। मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम-2017 के तहत सार्वजनिक स्थलों पर अमृत कक्ष (फीडिंग रूम), स्वच्छ शौचालय और योग कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जिन सार्वजनिक भवनों में 50 या उससे अधिक महिला कार्मिक कार्यरत हैं, वहां कम से कम एक शिशु गृह (क्रेच सेंटर) स्थापित किया जाना अनिवार्य होगा, ताकि कामकाजी महिलाओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
परिवहन, शिक्षा एवं पर्यटन विभाग को निर्देश दिए गए कि बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, टैक्सी स्टैंड, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक पार्कों में महिलाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, इंसीनेरेटर और अमृत कक्ष की व्यवस्था प्राथमिकता से की जाए।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों और उनके अनुपालन से संबंधित प्रावधानों की जानकारी अधिकारियों को दी।
मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विभागों को 30 मई तक निर्धारित प्रारूप में अनुपालन आख्या अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए कहा कि लापरवाही या देरी की स्थिति में संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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