महिला आरक्षण पर किए पाप से पर्दा डालने की कोशिश में कांग्रेस: भट्ट
महिला अधिकारों की हार पर कांग्रेसी जश्न से झलकी कांग्रेस की मंशा

देहरादून 21 अप्रैल। भाजपा ने कांग्रेस पर सदन में महिला आरक्षण को लेकर किए पाप पर पर्दा डालने और गुमराह करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा कि जो अब विधानसभा के सामने सीनाजोरी करना चाहते हैं, सदन में महिला अधिकारों पर की गई उनकी चोरी देश ने पकड़ी है। राहुल के नेतृत्व में विपक्ष के विरोध और बेशर्मी से उसपर मनाए जश्न से जनता बहुत नाराज है। यही वजह है कि अब उनके दिल्ली देहरादून के नेता एक बार फिर जनता के बीच भ्रम फैलाने और ध्यान भटकाने में जुट गए हैं।
कांग्रेस से सफाई पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के लिए विधानसभा के सामने धरने के बजाय अपनी पार्टी नेतृत्व को समझाना चाहिए था। क्योंकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम तो संसद के विशेष सत्र में 2029 से आरक्षण देने के लिए ही लाया गया था, जिसका विरोध कर विपक्ष द्वारा गिराया गया। अब उत्तराखंड में अलग से महिला आरक्षण को लेकर असंवैधानिक प्रक्रिया का मांग करके कांग्रेस अध्यक्ष किसे गुमराह करना चाहते हैं? या तो उन्हें संवैधानिक प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है या फिर वह देवभूमि जनता की समझ को कमतर आंक रहे हैं। उनका यह धरना महिला अधिकारों पर वह सीनाजोरी है, जिसकी संसद में चोरी करते देश लाइव देख चुका है। प्रदेश की जनता बहुत समझदार है और कांग्रेस के ऐसे राजनीतिक पाखंडों के झांसे में नहीं आने वाली है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज इस अधिनियम में “आरक्षण में आरक्षण” की असंवैधानिक मांग कर रही है। जबकि मनमोहन सरकार द्वारा पेश तत्कालीन महिला आरक्षण अध्यादेश में इसका जिक्र तक नहीं था। पहले कांग्रेस और विपक्ष भी एकमत था कि इस कानून को 2029 में लागू किया जाए। अब उसके लिए पूर्व में पारित कानून अनुसार पहले जनगणना, फिर परिसीमन की शर्त अनिवार्य है। उसमें भी जाति गणना शामिल होने से इस प्रक्रिया का 2029 से पहले किसी भी तरह से पूरा होना संभव नहीं था। यही वजह है कि संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर आवश्यक संशोधन लाए गए थे, जिसको विपक्ष ने पारित नहीं होने दिया।
उन्होंने तंज कसा कि दिल्ली से आए कांग्रेस आलाकमान के दूत जो कह रहे हैं, उसके उलट आचरण जनता ने संसद में देखा है। इसी महिला विरोधी नीयत के साथ वे संसद में महिला अधिकारों को बाधित करने के किए पाप को छुपाना चाहती हैं। देश ने देखा है जब संसद के विशेष सत्र में विपक्ष के बड़े-बड़े नेताओं और राहुल गांधी ने नारी शक्ति अधिनियम के खिलाफ वोट दिया। उससे भी दुख और शर्म की बात है, सदन में महिला अधिकारों पर हुई इस हार को विपक्ष द्वारा जीत बताकर जश्न मनाना।
उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि जो आज मीडिया में जाकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम और उस पर सदन में हुई बहस पर भ्रम और झूठ फैला रही हैं। उनका महिला विरोधी काला सच देश ने विशेष सत्र में हुई बहस में साफ साफ देखा है। हमे तो दुख है कि कांग्रेस और विपक्ष की महिला सांसदों ने भी मातृ शक्ति को अधिकार सम्पन्न बनाने के मुद्दे पर साथ नहीं दिया और अपने दलगत हित को सर्वोपरि रखा।
उन्होंने कहा, देश और प्रदेश की जनता, विशेषकर मातृ शक्ति आक्रोश में है। जिससे डरकर अब कांग्रेस पार्टी के नेता अपने ऊपर लगे दागों को छुपाने के लिए झूठ और भ्रम फैला रहे हैं।
वला उन्होंने कटाक्ष किया कि कांग्रेस को तो 60 वर्ष से अधिक निष्कंटक शासन का समय मिला, लेकिन कभी इस मुद्दे पर चर्चा तक नहीं होने दी। भाजपा ने तो विपक्ष में रहने के बावजूद कांग्रेस की मनमोहन सरकार के महिला बिल का समर्थन किया था, लेकिन अपनी ही सहयोगी समाजवादी पार्टी से लोकसभा में विरोध करवाया गया। सच्चाई ये है कि कांग्रेस की नीति और नीयत तो कभी महिला अधिकारों के पक्ष में नहीं थी।
भट्ट ने महिला अपराधों पर की गई कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता की टिप्पणियों बेबुनियादी बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला अपराध की घटना पर तत्काल और कठोर कार्रवाई हुई है, जिससे जनता संतुष्ट ही है। लेकिन कांग्रेस सरकारों में तो अपराध तक दर्ज नहीं होते हैं। खुद कांग्रेस के अंदर महिला नेत्रियां अपने शोषण के विरोध में पार्टी छोड़ कर जा रही हैं। जिन्होंने आज महिला मुद्दों पर ज्ञान दिया, उनको मंडी की महिला सांसद का भाव पूछते दुनिया ने देखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिला अधिकार और अपराध दोनों पर कांग्रेस पार्टी का इतिहास बहुत दागदार है। लिहाजा इस मुद्दे पर चर्चा का उनको कोई नैतिक अधिकार नहीं है। प्रदेश की जनता और विशेषकर महिलाएं अपने अपराधियों को एक बार फिर अच्छी तरह पहचान गई है और आने वाले चुनाव में करारा सबक सिखाएगी।


