एडिफ़ाई वर्ल्ड स्कूल में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित
साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार

देहरादून,13 मार्च 2026।
एडिफ़ाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीबीपी) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को छात्रों के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूक बनाना तथा उनकी व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम के पहले दिन साइबर सुरक्षा विषय पर सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन सतर्कता एवं शिक्षा विशेषज्ञ गर्वित दुग्गल तथा आशा मॉडर्न स्कूल, सहारनपुर की प्रधानाचार्या रुचि शर्मा ने किया। इस सत्र में शिक्षकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन गोपनीयता, डिजिटल फुटप्रिंट तथा छात्रों को जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की ओर मार्गदर्शन करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। साथ ही विद्यालयी वातावरण में साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निवारक उपायों और रणनीतियों से भी शिक्षकों को अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण’ विषय पर सत्र आयोजित हुआ, जिसका संचालन माँ आनंदमयी मेमोरियल स्कूल, हरिद्वार की प्रधानाचार्या मानसी सिंघल ने किया। इस दौरान विद्यालयी वातावरण में छात्रों और शिक्षकों के भावनात्मक कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने तनाव प्रबंधन, छात्रों में भावनात्मक संकट की पहचान तथा सहयोगात्मक एवं समावेशी कक्षा वातावरण तैयार करने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं सीओई प्रमुख मनीष त्यागी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और समृद्ध बनाया। उन्होंने अपने प्रेरणादायक विचारों के माध्यम से शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या हरलीन कौर चौधरी ने सभी रिसोर्स पर्सन्स और विशेष अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं विद्यालय के डायरेक्टर एडवोकेट पंकज होलकर ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते शैक्षिक परिवेश में बच्चों को साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे छात्रों के बेहतर मार्गदर्शन के लिए अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अद्यतन करते रहें।



