हर काम देश के नाम: विजय दिवस 2025 पर शौर्य स्थल में शहीदों को नमन
देहरादून 


16 दिसंबर 2025। 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध की ऐतिहासिक विजय के 54 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को विजय दिवस 2025 पूरे सम्मान और गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया द्वारा देहरादून स्थित शौर्य स्थल पर पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.), माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड, मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल रोहन आनंद, एडीजी एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय, ग्रुप कैप्टन ऋषभ शर्मा, रियर एडमिरल पीयूष पौसी, जॉइंट चीफ हाइड्रोग्राफर, एनएचओ देहरादून सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, सेवारत अधिकारियों, जेसीओ एवं अन्य रैंकों के जवानों ने शहीदों को नमन किया। उपस्थित सभी अधिकारियों और जवानों ने देश की आन-बान-शान की रक्षा हेतु वीर सैनिकों के आदर्शों का अनुसरण करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सेवारत एवं पूर्व सैनिकों से संवाद करते हुए राष्ट्र की रक्षा में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि 1971 का युद्ध भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, साहस और कुशल रणनीति का परिचय दिया। भारतीय सेना ने न केवल दुश्मन के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया, बल्कि पाकिस्तान के विभाजन के साथ बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया।
राज्यपाल ने कहा कि सशस्त्र बलों की उत्कृष्ट रणनीति, कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि 54 वर्ष पूर्व इस युद्ध में शहीद एवं घायल हुए जवानों के परिवारों की देखभाल करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और विजय दिवस पर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम सदैव उनके सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए तत्पर रहेंगे।
उन्होंने कहा कि आज भारत आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और भविष्य के युद्ध कौशल की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे सशस्त्र बलों की क्षमताएं और राष्ट्र की सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी। राज्यपाल ने कहा कि विजय दिवस केवल अतीत की जीत को स्मरण करने का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और भविष्य के लिए संकल्प लेने का अवसर भी है।
उल्लेखनीय है कि हर वर्ष 16 दिसंबर को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक विजय और शहीद जवानों के सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करते हुए विजय दिवस मनाया जाता है। तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष जनरल एस.एफ.एच.जे. मानेकशॉ के नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों ने यह अभूतपूर्व जीत हासिल कर राष्ट्र को गौरवान्वित किया। राष्ट्र अपने वीर सैनिकों के साहस, पराक्रम और बलिदान को सदा नमन करता है।

