अप्रैल माह में ग्रहों का महा परिवर्तन होने से देश दुनिया में होगी हलचल : “दैवज्ञ”

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23 अप्रैल से 29 जून के बीच शुक्र ग्रह के अस्त होने से नहीं बजेंगी शहनाइयां।

देहरादून 04अप्रैल । अप्रैल का यह महीना देश और दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है ,क्योंकि इस महीने में जहां एक तरफ नए संवत्सर की शुरुआत हो रही है, तो दूसरी तरफ इस महीने में बहुत सारे ग्रह स्थान परिवर्तन कर रहे हैं।
उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ”सौरमंडल का बारीकी से विश्लेषण करते हुए बताते हैं, कि ग्रहों के परिवर्तन की शुरुआत 2 अप्रैल से ही हो गई है, ग्रहों के राजकुमार बुद्ध ने वक्री चाल शुरू कर दी और 9 अप्रैल तक वक्री चाल चलने के बाद वह फिर से मीन राशि में लौट आएंगे और 10 मई को मेष राशि में चले जाएंगे।
6 अप्रैल को शनि पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में आ जाएंगे, जो देवगुरु बृहस्पति का नक्षत्र है, और उनके नक्षत्र परिवर्तन से भी ज्योतिष में हलचल होगी।
8 अप्रैल को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा, और 9 अप्रैल को नया हिंदू नव वर्ष यानी नया विक्रम संवत 2081 शुरू हो जाएगा सौरमंडल का चुनाव जीतने की वजह से इस साल के राजा मंगल होंगे और मंत्री शनि होंगे।
13 अप्रैल को सूर्य अपनी उच्च मेष राशि में आ जाएंगे और देवगुरु बृहस्पति के साथ ज्योतिष में अति महत्वपूर्ण “गुरु सिंह योग” बनेगा।
23 अप्रैल को दो बड़े परिवर्तन होंगे। मंगल ग्रह 23 अप्रैल को मीन राशि में आ जाएंगे जो देवगुरु बृहस्पति की राशि है और 23 अप्रैल को ही शुक्राचार्य अस्त हो जाएंगे और 29 जून तक अस्त रहेंगे। जिससे विवाह शादियों पर एक तरह से रोक लगी रहेगी। 25 अप्रैल को शुक्राचार्य अपनी उच्च मीन राशि से निकलकर मेष राशि में आ जाएंगे जहां सूर्य और देवगुरु बृहस्पति के साथ उनका गुरु सिंह योग बनेगा।
यानी अप्रैल महीना ग्रहों की हलचल से अप्रत्याशित परिवर्तन का महीना रहने वाला है ,और इन तमाम ग्रहों के परिवर्तन का सभी राशियों पर भी सीधा असर पड़ेगा। कुछ राशियों को तो जबरदस्त कामयाबी के योग है। ग्रहों का यह परिवर्तन कुछ राशियों की जिंदगी बदल देगा।

इसमें पहली भाग्यशाली राशि मेष राशि है-
अप्रैल महीना में सूर्य के अपनी उच्च राशि में आते ही इस राशि के जातकों के मान-सम्मान में बढ़ोतरी का योग बनेगा।
दूसरी भाग्यशाली राशि वृषभ राशि है- यह महीना वृष राशि वालों के लिए भाग्योदय करने वाला साबित होगा।
तीसरी भाग्यशाली राशि मिथुन राशि है
चौथी भाग्यशाली राशि कन्या राशि है-
कन्या राशि के तरक्की के रास्ते खुलते चले जाएंगे।
पांचवी भाग्यशाली राशि तुला राशि है
छठी भाग्यशाली राशि धनु राशि है-
प्रमोशन का योग भी बनेगा।
इसके अलावा कर्क राशि, सिंह राशि, वृश्चिक राशि, मकर राशि, कुंभ राशि और मीन राशि को मिले जुले परिणाम देखने को मिलेंगे। कर्क राशि को सावधानी जरूरी है। वृश्चिक राशि वालों को अपने पद प्रतिष्ठा और मान-सम्मान का ख्याल रखना होगा। मकर, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती के कारण ग्रहों के इस बड़े गोचर का मिला-जुला असर पड़ेगा।