श्री आदर्श रामलीला राजपुर में हुआ सीता हरण का भाव पूर्ण मंचन।

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राजपुर, देहरादून 22अक्टूबर। श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट राजपुर द्वारा आयोजित 74 वे श्री रामलीला महोत्सव में रावण की बहिन शूपर्णखा वन में विचरण करते हुए पंचवटी की ओर पहुंची जहां अति सुन्दर राम और लक्ष्मण के सुंदर रुप को देखकर शूपर्णखा मोहित हो गई । शूर्पणखा राम और लक्ष्मण से विवाह करने की जिद करने लगी, शूपर्णखा के अत्यधिक आक्रामक होने पर श्री राम की आज्ञा पाकर लक्षमण ने शूपर्णखा की नाक काट डाली, जिससे शूपर्णखा ने क्रोधित होकर अपने भाई खर और दूषण के पास जाकर सारा वृत्तांत सुनाया। भारी क्रोध में खर और दूषण ने राम से भयानक युद्ध किया, परिणाम स्वरूप खर और दूषण राम के हाथों मारे गये। फिर शूपर्णखा ने अपने ज्येष्ठ भ्राता लंकेश को सारा हाल सुनाकर सीता हरण के लिए रावण को तैयार किया। रावण ने अपने मामा मारीच को भय दिखाकर स्वर्ण मृग का रुप धारण कर अपने साथ चलने को कहा। जिससे स्वर्ण मृग को देखकर सीता आसक्त होकर राम और लक्ष्मण को स्वर्ण मृग के शिकार हेतु वन में दूर भेज दे, और सीता को अकेली देखकर छल बल से रावण उसका हरण कर सके। इस षड्यंत्र के अनुसार रावण सीता हरण करने में सफल रहा,रावण के चंगुल में रोती बिलखती सीता को बचाने के लिए आये जटायु को भी रावण ने गंभीर रुप से घायल कर सीता को विमान में बैठाकर लंका ले गया। रावण के षड्यंत्र का शिकार बने राम और लक्ष्मण ने पंचवटी सहित कई स्थानों पर सीता को ढूंढा किंतु सीता नहीं मिली, खोज के मार्ग मे गंभीर रूप से घायल जटायु की हालत देखकर राम के पूछने पर घायल जटायु ने रावण द्वारा सीता हरण का समाचार राम को बताया, और जटायु ने अंतिम सांस ली। जटायु के मुख से सीता हरण का समाचार सुनकर श्री राम ने रावण वध का संकल्प लिया तथा दिवंगत जटायु का अंतिम संस्कार कर उद्घार किया। ‌ श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट के डायरेक्टर श्री शिवदत्त, चरण सिंह तथा योगेश अग्रवाल के प्रभावी निर्देशन में शूपर्णखा लीला, खर दूषण वध,रावण मारीच संवाद,सीता लक्ष्मण मार्मिक संवाद,छद्म वेश में रावण द्वारा सीता का हरण, तथा जटायु उद्धार की अतिमार्मिक लीला का मंचन कलाकारों द्वारा कर श्रृद्धालु दर्शकों के हृदय पर गहरा प्रभाव पडा।
श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट के संरक्षक जयभगवान साहू, प्रधान योगेश अग्रवाल, मंत्री अंजय गोयल,कोषाध्यक्ष नरेन्द्र अग्रवाल,श्रवण अग्रवाल,वेद साहू,उपमंत्री अशोक साहू, आडिटर ब्रह्मप्रकाश वेदवाल, संजय धीमान,अमन अग्रवाल, डॉ विशाल अग्रवाल, मोहित अग्रवाल,अमन कन्नौजिया, करन कन्नौजिया,निशांत गोयल विभू वेदवाल,आदि के सक्रिय सहयोग से वनवास लीला भारी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति में संपन्न हुई।