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देहरादून में आपदा मॉक अभ्यास: भूकंप, बम सूचना, बाढ़ और हादसों के बीच 16 घायल, रेस्क्यू सिस्टम की परखी गई क्षमता

देहरादून,18 मार्च 2026 । उत्तराखण्ड में संभावित प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान त्वरित एवं समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता को परखने के उद्देश्य से जनपद देहरादून में व्यापक मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग आपदा परिदृश्यों का सिमुलेशन किया गया, जिसमें कुल 16 लोग घायल दर्शाए गए।
प्रातः 09:45 बजे आपदा कंट्रोल रूम को ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में बम होने की सूचना प्राप्त होने पर भगदड़ की स्थिति उत्पन्न होने का परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में जिला स्तरीय आईआरएस (Incident Response System) को तत्काल सक्रिय किया गया और राहत-बचाव टीमें मौके पर भेजी गईं।
इसी क्रम में सुबह 6.5 तीव्रता के भूकंप के झटकों का भी सिमुलेशन किया गया। तहसील विकासनगर क्षेत्र के हरबर्टपुर ट्रांजिट कैंप में आग लगने और भगदड़ मचने की स्थिति में 4 घायलों को सुरक्षित निकालकर उपचार हेतु भेजा गया।
ऋषिकेश क्षेत्र में त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से तीर्थ यात्रियों के बहने की स्थिति का भी अभ्यास किया गया। इस दौरान 2 लोगों के लापता होने का परिदृश्य बनाकर एसडीआरएफ, पुलिस और जल पुलिस की टीमों द्वारा संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें दोनों को सकुशल खोज निकाला गया। वहीं ट्रांजिट कैंप में बम सूचना से उत्पन्न भगदड़ में 4 लोग घायल दर्शाए गए, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
कालसी क्षेत्र में एनएच-707 (जुड्डो-यमुना पुल मार्ग) पर वाहन दुर्घटना का मॉक ड्रिल किया गया, जिसमें 3 लोग घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर दिखाई गई। रेस्क्यू टीमों ने सभी घायलों को निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। वाहन में कुल 9 यात्री सवार बताए गए।
मसूरी क्षेत्र में देहरादून-मसूरी-टिहरी मोटर मार्ग (एनएच-707ए) पर होटल देवलोक के समीप भूस्खलन और सड़क धंसने की स्थिति का अभ्यास किया गया। मार्ग अवरुद्ध होने पर फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया तथा वैकल्पिक मार्गों से यातायात बहाल किया गया। इस घटना में 3 घायलों को 108 सेवा के माध्यम से सिविल अस्पताल मसूरी भेजा गया।
कंट्रोल रूम में उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे और विभिन्न घटनास्थलों पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे। जिलाधिकारी स्वयं पूरे अभियान की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे और सफल संचालन सुनिश्चित कराया।
अभ्यास के दौरान विकासनगर, ऋषिकेश, कालसी और मसूरी में संबंधित उप जिलाधिकारियों के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित किए गए। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, तत्परता और प्रतिक्रिया समय का परीक्षण करना रहा।
कंट्रोल रूम में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला सूचना अधिकारी बी.सी. नेगी, जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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