नैनीताल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
PTCUL के एमडी (अतिरिक्त प्रभार) प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति रद्द, योग्यता नियमों को माना अनिवार्य
देहरादून | 19 फरवरी 2026
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के प्रबंधक निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को रद्द कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति आशीष नैथानी एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ द्वारा याचिकाकर्ता राजीव गुप्ता की ओर से दायर रिट याचिका (सर्विस बेंच) संख्या 295/2025 में सुनाया गया।
याचिकाकर्ता राजीव गुप्ता, जो PTCUL में चीफ इंजीनियर लेवल-1 हैं तथा वरिष्ठता के आधार पर प्रबंध निदेशक पद के स्वाभाविक दावेदार माने जाते हैं, ने 10 सितंबर 2022 को प्रकाश चंद्र ध्यानी को दिए गए अतिरिक्त प्रभार को चुनौती दी थी। गुप्ता ने दलील दी थी कि नियमित चयन प्रक्रिया लंबित होने के बावजूद यह नियुक्ति उत्तराखंड चयन एवं नियुक्ति ऑफ मैनेजिंग डायरेक्टर एंड डायरेक्टर्स प्रक्रिया निर्धारण नियम, 2021 (संशोधित) के नियम 9-ए का उल्लंघन है।
इंजीनियरिंग डिग्री अनिवार्य, नियमों की अनदेखी अस्वीकार्य
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि PTCUL में प्रबंधक निदेशक बनने के लिए इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री अनिवार्य है, जो प्रकाश चंद्र ध्यानी के पास नहीं है। अदालत ने कहा कि ध्यानी की नियुक्ति “नियुक्ति नियम 9-ए” का सीधा उल्लंघन है, इसलिए इसे अस्वीकृत किया जाता है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि नियमित चयन प्रक्रिया पूरी होने तक प्रबंधक निदेशक पद के लिए वैकल्पिक अंतरिम व्यवस्था की जाए और इस दौरान नियुक्ति नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि निगम के कार्यों और परियोजनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
पारदर्शिता और योग्यता की जीत
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ. कार्तिकेय हरि गुप्ता ने फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता, योग्यता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद भविष्य में योग्यता को नजरअंदाज कर नियुक्ति करना आसान नहीं होगा।
कर्मचारियों और इंजीनियरिंग बिरादरी में खुशी
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद PTCUL के कर्मचारियों और इंजीनियरिंग समुदाय में खुशी का माहौल है। कर्मचारियों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य की नियुक्तियों के लिए एक मिसाल बनेगा और अब योग्य एवं वरिष्ठ इंजीनियरों को प्रोन्नति के लिए निराश नहीं होना पड़ेगा। इसे निगम की प्रोन्नति व्यवस्था और कार्यसंस्कृति के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार को शीघ्र ही योग्य प्रबंध निदेशक की अंतरिम व्यवस्था करनी होगी, ताकि उत्तराखंड की बिजली पारेषण व्यवस्था और PTCUL की महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित न हों।
