इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में 24वें संजय कुमार सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन
उत्तराखंड के राज्यपाल ने भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षणरत अधिकारी प्रशिक्षुओं के शानदार प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया
कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों के नाजुक पर्यावरण में सस्टेनेबल फॉरेस्ट मैनेजमेंट के महत्व को रेखांकित किया गया
देहरादून 15 फरवरी।
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में 24वें संजय कुमार सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टि. जनरल गुरमीत सिंह बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और स्मृति व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम का आरंभ राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से हुआ जिसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा स्वर्गीय श्री संजय कुमार सिंह, IFS के चित्र के सम्मुख दीपक प्रज्वलित किया गया और पुष्पांजति अर्पित की गई, जिनका जीवन और कर्तव्य निर्वहन के पथ पर किया गया प्राणोत्सर्ग वन अधिकारियों को पीढि़यों तक प्रेरित करता रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती भारती, निदेशक, राष्ट्रीय वन अकादमी द्वारा स्वर्गीय श्री संजय कुमार सिंह के माता-पिता को उनके पुत्र द्वारा भारतीय वन सेवा में दिए गए शानदार योगदान और सर्वोच्च बलिदान के लिए सम्मान, आदर और कृतज्ञता के भाव के साथ शॉल देकर सम्मानित किया गया। सभी उपस्थित अतिथि भावपूर्ण मन से इस पल के साक्षी बने। स्व. श्री संजय कुमार सिंह के पिता डॉ. घनश्याम नरेन सिंह ने उनके जीवन से जुड़ी घटनाएं और स्मृतियां साझा कीं और कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण को नमन किया।
इस अवसर पर, उत्तराखंड के राज्यपाल द्वारा भारतीय वन सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षणरत अधिकारी प्रशिक्षुओं के पांच ग्रुपों को ट्रेनिंग के दौरान उनके शानदार प्रदर्शन तथा उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
अपने व्याख्यान में राज्यपाल द्वारा विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों के नाजुक पर्यावरण में सस्टेनेबल फॉरेस्ट मैनेजमेंट के महत्व को रेखांकित किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया। उन्होंने अवैध खनन, अतिक्रमण, वनों में लगने वाली आग, प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित उपयोग तथा और इंसानों व जानवरों के बीच टकराव जैसी चुनौतियों के विषय में विस्तार से अपने विचार साझा किए और युवा अधिकारियों से कार्य-दक्षता, नवाचार, हमदर्दी और साहस के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने अनुशासन, धैर्य, के साथ निर्णय लेने में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने तथा निस्वार्थ सेवा भावना पर भी ज़ोर देते हुए उनसे भारतीय वन सेवा की श्रेष्ठ परंपरा और विरासत को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्व. संजय सिंह के बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित एक पुस्तक तैयार करना उनके जीवन से सीखने की दिशा में एक अच्छा कदम होगा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत तथा राष्ट्रगान के गायन के साथ हुआ। इस स्मृति व्याख्यान ने स्वर्गीय श्री संजय कुमार सिंह की सतत विरासत को आगे बढ़ाने की भावना के साथ-साथ देश के वनों एवं प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा के प्रति समर्पित, अखंड निष्ठावान, योग्य और सहानुभूतिपूर्ण अधिकारियों को तैयार करने के प्रति इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी की प्रतिबद्धता को पुष्ट किया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय वन अकादमी देहरादून की निदेशक के अतिरिक्त, उत्तराखंड वन विभाग के पीसीसीएफ एवं हॉफ श्री रंजन कुमार मिश्र, आईजीएनएफए के अपर निदेशक श्री राज कुमार बाजपेयी, केंद्रीय अकादमी राज्य वन सेवा (CASFoS) देहरादून के प्रधानाचार्य (इंचार्ज) डॉ. भानुदास पिंगले, देहरादून स्थित केंद्रीय कार्यालयों तथा सह-संस्थानों के प्रमुख और अन्य अधिकारीगण, वैज्ञानिकगण, वरिष्ठ भारतीय वन सेवा अधिकारी, आईजीएनएफए में प्रशिक्षणरत 2025 बैच के आईएफएस प्रशिक्षु अधिकारीगण, एफआरआई (डीम्ड) यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एवं एनर्जी स्टडीज़ तथा ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स और छात्र, आईजीएनएफए एवं केंद्रीय अकादमी राज्य वन सेवा (CASFoS) देहरादून के संकाय सदस्य तथा स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित हुए, जो स्वर्गीय श्री संजय कुमार सिंह की विरासत के प्रति फॉरेस्ट्री और एकेडमिक कम्युनिटी के गहरे सम्मान को दर्शाता है।