लोक भवन देहरादून में ‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म)’ का भव्य शुभारंभ


देहरादून 13 फरवरी,2026 । शुक्रवार को लोक भवन, देहरादून में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने ‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म)’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भीष्म के लोगो और आधिकारिक वेबसाइट का भी अनावरण किया। ‘भीष्म’ एक रणनीतिक थिंक टैंक है, जिसका उद्देश्य देहरादून और उत्तराखण्ड में उपलब्ध बौद्धिक संसाधनों को एकत्र कर राज्य को देश में रणनीतिक चिंतन का अग्रणी केंद्र बनाना है।
शुभारंभ समारोह में राज्यपाल ने कहा कि देहरादून में ‘भीष्म’ की स्थापना उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मंच राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक नीति-निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावशाली थिंक टैंक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
राज्यपाल ने उत्तराखण्ड की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की दो अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ होने के कारण यहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विशेष जिम्मेदारियाँ हैं। हिमालय की यह भूमि सदैव साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्ररक्षा की प्रेरणा देती रही है। ऐसे परिप्रेक्ष्य में ‘भीष्म’ राष्ट्रीय हित, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक विमर्श का एक गंभीर व समावेशी मंच बनेगा।
इस मंच की संस्थापक टीम का नेतृत्व जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, द्वारा किया जा रहा है। उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (से नि), सदस्य, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड जुड़े हैं। अन्य प्रमुख सदस्यों में कर्नल (डॉ.) गिरिजा शंकर मुंगली (से नि), श्री संजीव चोपड़ा, आईएएस (से नि), प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, श्री नितिन गोखले तथा श्री राजन आर्य शामिल हैं।
राज्यपाल ने लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (से नि) के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस विचार को साकार करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साथ ही उन्होंने जनरल अनिल चौहान के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि जनरल अनिल चौहान ने “फ्रंटियर्स, बॉर्डर्स एंड एलएसीः द मिडिल सेक्टर” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी सीमाओं के मध्य सेक्टर के बढ़ते रणनीतिक महत्व और सरकार द्वारा अवसंरचना विकास पर दिए जा रहे विशेष बल पर प्रकाश डाला।
सीडीएस ने कहा कि गंगा-यमुना के पावन उद्गम स्थल, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे दिव्य धाम उत्तराखण्ड को विशिष्ट गरिमा प्रदान करते हैं। यह क्षेत्र केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि चेतना, संस्कृति और सभ्यता का जीवंत केंद्र है। ऐसे में हिमालय की गोद में स्थापित ‘भीष्म’ जैसे थिंक टैंक से उपजा चिंतन भू-परिस्थितियों के प्रति सजग, तंत्र-समन्वित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण वाला होगा।
लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (से नि) ने बताया कि ‘भीष्म’ हिमालयी क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक विषयों पर भारत सरकार को परामर्श देगा और देहरादून व आसपास के शैक्षणिक एवं अन्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। कार्यक्रम की शुरुआत मध्य कमान (लखनऊ) के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता के उद्घाटन भाषण से हुई। इसके पश्चात श्री संजीव चोपड़ा, आईएएस (से नि) ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति, चिंतक, विचारक, सेना के वरिष्ठ अधिकारी एवं पूर्व सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।