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उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के परिसरों को सुदृढ़ करने पर जोर: मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने दिए अवस्थापना व फैकल्टी व्यवस्था के निर्देश

देहरादून 12 फरवरी। मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के छह परिसर संस्थानों को राज्य एवं केंद्र पोषित योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर देते हुए विश्वविद्यालय को आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के विकास तथा फैकल्टी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित विश्वविद्यालय परिसरों में यदि छात्रों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो वहां संचालित पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी और इन परिसरों की स्थापना के मूल उद्देश्य भी सफलतापूर्वक पूरे हो सकेंगे।
मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय को प्रौद्योगिकी संस्थान गोपेश्वर, पिथौरागढ़, टनकपुर, बौन (उत्तरकाशी) एवं डब्ल्यू.आई.टी. देहरादून में हॉस्टल निर्माण सहित अन्य आवश्यक आवासीय भवनों के निर्माण के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों के साथ-साथ प्रमुख फैकल्टी को भी आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय को अपने आय के संसाधनों में वृद्धि तथा अवस्थापना विकास पर होने वाले व्यय से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव शासन को प्रस्तुत करने को कहा, ताकि उस पर नीतिगत स्तर पर विचार किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों को इन संस्थानों में अध्ययन हेतु आकर्षित करने के लिए हॉस्टल, फैकल्टी की पर्याप्त व्यवस्था, आधुनिक उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता अनिवार्य है।
मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय की कुलपति से अपेक्षा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय परिसरों के बेहतर संचालन से संबंधित एक समग्र एवं व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार कर शासन को उपलब्ध कराया जाए। प्रस्ताव में अवस्थापना विकास पर आने वाले व्यय भार को स्पष्ट करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि वित्त विभाग से परामर्श के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
बैठक में विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय के कार्य-कलापों, परिसरों में उपलब्ध संसाधनों तथा वर्तमान अवस्थापना सुविधाओं की जानकारी दी।
इस अवसर पर सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा, वी. षणमुगम, रजिस्ट्रार राजेश उपाध्याय, निदेशक डब्ल्यू.आई.टी. मनोज पाण्डा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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