निजी निवेश के माध्यम से कार्गो टर्मिनल बनाने को बढ़ावा देने के लिए, ‘गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT)’ पॉलिसी शुरू की गई है: अश्विनी वैष्णव
– रेल, सूचना प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सवाल का दिया जवाब
– श्री वैष्णव ने कहा- उत्तराखंड में GCTs के डेवलपमेंट के लिए 3 जगहों (पथरी, लक्सर और इकबालपुर) के प्रपोज़ल मिले हैं, जिसमें हरिद्वार-लक्सर इंडस्ट्रियल एरिया भी शामिल है, जहाँ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल (IPA) पहले ही दे दिए गए हैं
नई दिल्ली 11 फरवरी ।
बुधवार को लोकसभा में रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सवाल हरिद्वार-लक्सर औद्योगिक क्षेत्र में रेल कार्गो टर्मिनल की स्थापना पर जवाब देते हुए कहा- निजी निवेश के माध्यम से कार्गो टर्मिनलों की स्थापना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, ‘गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल’ नीति शुरू की गई है, जिसके तहत प्रति वर्ष 198 मिलियन टन की अनुमानित यातायात क्षमता वाले 124 गति शक्ति मल्टी मोडल कार्गो टर्मिनलों को पहले ही कमीशन किया गया है। इसके अलावा, 280 अतिरिक्त स्थानों के लिए सैद्धांतिक अनुमोदन दे दिया गया है।
अब तक, हरिद्वार-लक्सर औद्योगिक क्षेत्र सहित उत्तराखंड में गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल के विकास के लिए 3 स्थानों (पथरी, लक्सर और इकबालपुर) के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं जहां सैद्धांतिक अनुमोदन पहले ही दिए जा चुके हैं। प्रस्तावित स्थान, क्षमता और इनके उद्देश्य का ब्यौरा निम्नानुसार है –
1.स्थान- पथरी, क्षमता- 01 फुल रेक कंटेनर साइडिंग, उद्देश्य- कंटेनर यातायात की सुविधा के लिए
2.स्थान- लक्सर, क्षमता- 03 फुल रेक कंटेनर साइडिंग, उद्देश्य- कंटेनर यातायात की सुविधा के लिए
3.स्थान- इकबालपुर, क्षमता- 02 फुल रेक संभलाई लाइनें, उद्देश्य- इनवर्ड क्लिंकर और आउटवर्ड बैग्ड सीमेंट की सुविधा के लिए
केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल नीति के प्रावधानों के अनुसार, एजेंसियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्माण-कार्य शुरू करने के लिए अंतिम अनुमोदन प्राप्त होने के चौबीस (24) महीनों के भीतर निर्माण-कार्य को कार्यान्वित/पूरा करें। गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल का स्थान उद्योग से मांग, कार्गो यातायात की संभावना, रेल अवसंरचना की उपलब्धता और क्षेत्र की समग्र संभार तंत्र क्षमता के आधार पर तय किया जाता है।