देहरादून में 33 स्थानों पर विराट हिन्दू सम्मेलन, संगठन और समरसता का दिया संदेश
देहरादून 08 फरवरी। 

हिन्दू समाज की एकता, सामाजिक समरसता एवं सनातन सांस्कृतिक चेतना के जागरण के उद्देश्य से रविवार, 8 फरवरी 2026 को महानगर देहरादून में कुल 33 स्थानों पर विराट हिन्दू सम्मेलन एवं हिन्दू सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में नगरवासी, संत-महात्मा, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की।
इसी क्रम में रायपुर में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र जी ने कहा कि इतिहास में हिन्दू समाज के साथ हुए अन्याय तथा वर्तमान समय की सामाजिक-सांस्कृतिक चुनौतियों का समाधान संगठन और समरसता से ही संभव है। उन्होंने सभी प्रकार के भेदभाव को भुलाकर समाज को एकजुट करने और भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए निरंतर प्रयास का आह्वान किया।
वार्ड 11 में आयोजित सम्मेलन में संघ के प्रांत कार्यवाह श्री दिनेश सेमवाल जी ने कहा कि संघ की स्थापना डॉ. हेडगेवार जी ने सम्पूर्ण हिन्दू समाज को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य एवं पर्यावरण संरक्षण—को समाज जीवन में आत्मसात करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर ललितानन्द गिरि जी ने राष्ट्र आराधना को प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताया। संतशिरोमणि राम विशालदास जी महाराज ने सामाजिक जागरूकता पर बल दिया। कथाव्यास शिव प्रसाद ममगाई जी ने नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया, जबकि राष्ट्रीय ओजस्वी कवि श्रीकांत शर्मा ‘श्री’ ने कविता पाठ के माध्यम से राष्ट्रभाव को जागृत किया।
सम्मेलनों के दौरान राम स्तुति, महिषासुर मर्दिनी एवं महाभारत कथा पर आधारित कथक नृत्य नाटिकाओं का आकर्षक मंचन किया गया। साथ ही विभिन्न सेवा कार्यों से जुड़े समाजबंधुओं को ‘सनातन वीर’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।
दक्षिण महानगर के अंतर्गत रायपुर, रावत फार्म (वार्ड-96 नवादा-बद्रीपुर), शिवनगर एमडीडीए, डिफेंस कॉलोनी (वार्ड-58), झिवरेड़ी न्यू एरा एकेडमी, ब्रह्मपुरी छठ पार्क, पूर्वी पटेल नगर भंडारी बाग पार्क, देहरा खास सूरकंडा माता मंदिर, भवानी बालिका स्कूल सहित अनेक वार्डों एवं मोहल्लों में सम्मेलन, हवन-यज्ञ, कलश यात्रा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आयोजकों के अनुसार, इन 33 कार्यक्रमों के माध्यम से हिन्दू समाज में संगठन, समरसता एवं राष्ट्रबोध को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।