देहरादून: सामाजिक चुनौतियों के बीच हिंदू एकता का आह्वान, पंडितवाड़ी में विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित
देहरादून, 1 फरवरी 2026 । 


देश के समक्ष खड़ी सामाजिक, सांस्कृतिक और आंतरिक चुनौतियों के समाधान तथा संगठित, सशक्त और संस्कारित हिंदू समाज के निर्माण के उद्देश्य से देहरादून के वार्ड संख्या 38, पंडितवाड़ी में रविवार को एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों की सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. शोभाराम उनियाल द्वारा श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात गुरुकुल की कन्याओं द्वारा वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
“हिंदू संस्कृति सनातन है” – मा. धनंजय
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक मा. धनंजय जी ने संघ गाथा एवं पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति सनातन है, जिसका अर्थ शाश्वत होता है। यह संस्कृति प्राचीन होते हुए भी समय के साथ सदैव नवीन बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि हिंदू परिवार एवं कुटुंब व्यवस्था समाज की मूल शक्ति है, जहां व्यक्ति में संस्कारों का निर्माण होता है और वही संस्कार समाज को शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपने-अपने घर से सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत करने का आह्वान किया।
समाज निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका अहम
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि आचार्या डॉ. अन्नपूर्णा जी (वेद विदुषी), पूर्व प्राचार्या, आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय ने समाज निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका पर प्रभावशाली उद्बोधन दिया।
उन्होंने वैदिक उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और राष्ट्र के सशक्तिकरण में नारी शक्ति की भूमिका केंद्रीय है। स्वस्थ एवं समृद्ध समाज के लिए नारी के प्रति उत्तम आचरण, विचार और व्यवहार अनिवार्य है।
संत सान्निध्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मां दक्षिणेश्वरी सिद्ध काली पीठ, बाजपुर के पूर्व महंत विकास नाथ जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री डी.पी.एस. चौहान (सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता), सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश ने की।
सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन के माध्यम से समाज में हिंदू जागरण की दिशा को नई ऊर्जा, चेतना और संगठनात्मक मजबूती देने का संदेश दिया गया।