उत्तराखण्डहेल्थ

सर्वाइकल कैंसर से बचाव की बड़ी पहल,HPV वैक्सीन जल्द,राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में, उत्तराखंड में तैयारियाँ तेज

दून चिकित्सालय से स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण रोस्टर जारी

देहरादून 30 जनवरी 2026। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके क्रियान्वयन को लेकर देशभर में तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड में भी स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और दून चिकित्सालय से प्रशिक्षण रोस्टर जारी कर दिया गया है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने बताया कि HPV एक अत्यंत सामान्य वायरस है, जो आगे चलकर महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर का कारण बन सकता है। भारत में यह कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। HPV वैक्सीन बीमारी होने से पहले सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकारी योजना के तहत HPV वैक्सीनेशन का मुख्य लक्ष्य 9 से 14 वर्ष की किशोरियाँ होंगी। विशेषज्ञों के अनुसार इसी आयु वर्ग में वैक्सीन का प्रभाव सबसे अधिक होता है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में इसके शामिल होने से देश के दूरदराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक भी इस वैक्सीन की पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।
वर्तमान में HPV वैक्सीन निजी क्षेत्र में उपलब्ध है, जबकि कुछ राज्यों एवं चिकित्सा संस्थानों में इसे निःशुल्क या रियायती दरों पर भी दिया जा रहा है। राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद यह वैक्सीन व्यापक स्तर पर सुलभ हो सकेगी।
उत्तराखंड में इस फैसले को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता जैन ने कहा,
“9 से 14 वर्ष की उम्र में HPV वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है। शादी के बाद भी वैक्सीन दी जा सकती है, लेकिन पहले देने से सुरक्षा कहीं अधिक मिलती है। यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और दुनिया के कई देशों में वर्षों से सफलतापूर्वक दी जा रही है।”
उन्होंने समाज में HPV वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि भ्रांतियों और झिझक को दूर किया जा सके। सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाना महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों और उससे होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी।

Related Articles

Back to top button