उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

अखंड ज्योति शताब्दी समारोह युग परिवर्तन का शुभारंभ : राज्यपाल

शांतिकुंज केवल आश्रम नहीं, युगतीर्थ और आध्यात्मिक प्रयोगशाला : गुरमीत सिंह

लोक भवन, देहरादून 24 जनवरी,2026 ।

🔱 राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को हरिद्वार स्थित शांतिकुंज द्वारा आयोजित अखंड ज्योति शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक समारोह नहीं, बल्कि युग परिवर्तन का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि भले ही इसे समापन समारोह कहा जा रहा हो, किंतु वास्तव में यह एक नए युग की शुरुआत है। यह चेतना का महाकुंभ है, जिसने व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण की नई यात्रा को गति प्रदान की है।
राज्यपाल ने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर सेवा, समर्पण, साधना और प्रज्ञा का वह संदेश देता है, जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि 51 दिवसीय इस अनुष्ठान ने पूरी मानवता को साधना, सेवा और समन्वय का संदेश दिया है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक और नैतिक पुनर्निर्माण का संकल्प है, जिसे प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि गायत्री परिवार ने विश्वभर में सेवा और संस्कार का जो विराट कार्य किया है, वह युग परिवर्तन की दिशा में एक सशक्त आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि 80 से अधिक देशों में फैला यह आध्यात्मिक आंदोलन, हजारों केंद्रों और करोड़ों अनुयायियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और मानव उत्थान का संदेश दे रहा है।
राज्यपाल ने शांतिकुंज को केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि युगतीर्थ और आध्यात्मिक प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि यहां साधना, प्रशिक्षण और सेवा के माध्यम से श्रेष्ठ नागरिक और श्रेष्ठ मानव का निर्माण किया जाता है। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व में हो रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुदेव की विचारधारा को समकालीन संदर्भों से जोड़कर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गायत्री परिवार कोई साधारण संस्था नहीं, बल्कि यह संस्कृति की सरिता, संस्कारों का सागर और अध्यात्म की आलौकिक आभा है, जो संपूर्ण विश्व को सनातन मूल्यों का दिग्दर्शन करा रही है। उन्होंने कहा कि अखंड ज्योति साधारण प्रकाश नहीं है, बल्कि यह वह ज्योति है जो बाहर से अधिक भीतर प्रकाशित होती है। यह बुद्धि को विवेक से, कर्म को धर्म से और जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करती है। यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व अशांति, अनिश्चितता और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। व्यापार को हथियार बनाया जा रहा है और शक्ति के बल पर वर्चस्व स्थापित करने की प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य और गायत्री परिवार ही विश्व को शांति, सद्भाव और मानवता की दिशा में मार्गदर्शन देने में सक्षम हैं।
इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पंड्या, दलनायक जन्मशताब्दी समारोह, गायत्री विश्व परिवार ने उपस्थित जनसमूह एवं श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी।

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