राष्ट्रीयविशेष समाचारशिक्षासंस्कृति

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 11वें इंडिया इंटरनेशनल डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल-2026 का भव्य शुभारंभ

कला और संस्कृति भारत को दुनिया से जोड़ने में निभाती हैं अहम भूमिका : सांसद सतनाम सिंह संधू

33 देशों के 350 से अधिक कलाकारों ने पेश की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

चंडीगढ़ 20 जनवरी। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय 11वें इंडिया इंटरनेशनल डांस एंड म्यूजिक फेस्टिवल-2026 का भव्य आगाज हो गया। इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) के सहयोग से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव की थीम ‘एक दुनिया, अनेक संस्कृतियां’ रखी गई है। फेस्टिवल में 33 देशों के 350 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं, जो अपने-अपने देशों की सांस्कृतिक विरासत, लोकनृत्य, संगीत और कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आयोजन वैश्विक एकता और सांस्कृतिक विविधता का सशक्त संदेश दे रहा है।
महोत्सव के पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर एवं सांसद (राज्यसभा) सतनाम सिंह संधू ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारत आज वैश्विक पर्यटन और शिक्षा का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। वर्ष 2014 के बाद देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब विदेशी छात्र भी भारत को शिक्षा का प्रमुख हब मान रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 65 देशों से आए लगभग 3000 विदेशी छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक शिक्षा का केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति ऐसी सार्वभौमिक भाषा हैं, जिन्हें हर व्यक्ति समझता है। यही माध्यम भारत को पूरी दुनिया से जोड़ने और बेहतर रिश्ते बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
पहले दिन की शानदार प्रस्तुतियां
महोत्सव के उद्घाटन सत्र में डॉ. एल. सुब्रमण्यम और कविता कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम के नेतृत्व में 80 सदस्यों वाले लक्ष्मीनारायण ग्लोबल म्यूजिक फेस्टिवल ग्रुप ने शानदार प्रस्तुति दी। इस दौरान अस्ताना फिलहारमोनिक सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा, अक्टोबे रीजनल फिलहारमोनिक के चैंबर क्वायर और कजाकिस्तान के डांस ग्रुप ‘गक्कू’ ने संयुक्त रूप से मंच पर समां बांध दिया।
गक्कू ग्रुप ने अपने पारंपरिक लोकनृत्य के माध्यम से कजाकिस्तान के इतिहास, घुड़सवारों की वीरता और विशाल खुले मैदानों की झलक दिखाई। उनकी तेज-तर्रार परफॉर्मेंस और बैले स्टाइल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद किर्गिस्तान के ओश रीजनल फिलहारमोनिक के तहत लोक-कथा दल आलम और नृत्य समूह अदेमी ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुतियों से किर्गिज संस्कृति की झलक पेश की।
तीसरी प्रस्तुति में मलेशिया की सूत्र फाउंडेशन की 17 सदस्यीय टीम ने ‘राधे-राधे: द स्वीट सरेंडर’ पर आधारित प्रस्तुति दी, जिसमें भगवान कृष्ण और राधा के शाश्वत प्रेम और भक्ति का भावपूर्ण चित्रण किया गया।
इसके अलावा पंजाब के पारंपरिक लोकनृत्य लूडी की प्रस्तुति चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा दी गई। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, सूडान, तंजानिया, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, लेसोथो, म्यांमार, यमन, श्रीलंका, अंगोला, मलावी, कैमरून, सीरिया, जिम्बाब्वे, दक्षिण सूडान, कांगो, थाईलैंड, युगांडा, माली, नामीबिया, केन्या, सोमालिया, घाना और मेडागास्कर सहित कई देशों के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का परिचय
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी NAAC से A+ ग्रेड प्राप्त और क्यूएस वर्ल्ड रैंक धारक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है। यह यूजीसी से मान्यता प्राप्त स्वायत्त संस्थान पंजाब राज्य में चंडीगढ़ के समीप स्थित है। यह भारत की सबसे युवा और पंजाब की एकमात्र निजी यूनिवर्सिटी है, जिसे NAAC द्वारा A+ ग्रेड प्रदान किया गया है।
यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ, आर्किटेक्चर, जर्नलिज्म, एनीमेशन, होटल मैनेजमेंट और कॉमर्स सहित 109 से अधिक अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम संचालित किए जाते हैं।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकॉर्ड के लिए वर्ल्ड कंसल्टिंग एंड रिसर्च कॉर्पोरेशन (WCRC) द्वारा ‘यूनिवर्सिटी विद बेस्ट प्लेसमेंट’ अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
यह अंतरराष्ट्रीय महोत्सव न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है, बल्कि दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम भी बन रहा

Related Articles

Back to top button