एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के शोधकर्ताओं की बड़ी उपलब्धि, लिक्विड हाइड्रोजन के सुरक्षित परिवहन की नई तकनीक विकसित

देहरादून, 16 दिसंबर। भारत के क्लीन एनर्जी मिशन को मजबूती देने की दिशा में एक अहम सफलता हासिल करते हुए एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) के शोधकर्ताओं ने लिक्विड हाइड्रोजन के सुरक्षित, किफायती और सरल परिवहन की नई तकनीक विकसित की है। यह नवाचार हाइड्रोजन को बड़े पैमाने पर ऊर्जा प्रणाली में शामिल करने की सबसे बड़ी चुनौती—इसके सुरक्षित परिवहन—का समाधान प्रस्तुत करता है।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की शोध टीम ने लिक्विड ऑर्गेनिक हाइड्रोजन कैरियर (LOHC) सिस्टम विकसित किया है, जिसके माध्यम से हाइड्रोजन को एक स्थिर और सुरक्षित लिक्विड रूप में परिवर्तित कर सामान्य तापमान और दबाव पर आसानी से परिवहन किया जा सकता है। इस तकनीक में आग या विस्फोट का खतरा नहीं है, जिससे हाइड्रोजन को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना संभव हो सकेगा।
इस शोध के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रो. (डॉ.) राजीब कुमार सिन्हाराय ने बताया कि शुरुआती 50 दिनों तक कोई ठोस परिणाम नहीं मिले, लेकिन टीम ने धैर्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य जारी रखा। लगभग 10 महीनों में 100 से अधिक प्रयोगों के बाद यह बड़ी सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि निरंतर मेहनत और वैज्ञानिक लगन से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
इस इनोवेशन की शुरुआत उस समय हुई जब ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड की टीम एक जटिल समस्या के समाधान के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू पहुंची। देश के कई प्रमुख संस्थानों में इसका समाधान नहीं मिल पाया था। चूंकि इस तकनीक का कोई पूर्व लिखित तरीका उपलब्ध नहीं था, इसलिए रिसर्च टीम ने शुरू से अंत तक पूरी प्रक्रिया विकसित की। इस तकनीक के लिए ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने इंटरनेशनल पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर श्री सिद्धार्थ मयूर ने कहा कि यह तकनीक हाइड्रोजन के सुरक्षित और बड़े पैमाने पर परिवहन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह नवाचार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है और कंपनी इसे भविष्य में एक कमर्शियल प्रोडक्ट के रूप में विकसित करने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि अभी तक हाइड्रोजन का परिवहन या तो अत्यधिक दबाव वाले सिलेंडरों में किया जाता है या फिर माइनस 253 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लिक्विड रूप में रखा जाता है, जो महंगा और जोखिम भरा है। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की LOHC तकनीक इस समस्या का समाधान करते हुए दो चरणों—हाइड्रोजनेशन और डीहाइड्रोजनेशन—की प्रक्रिया के माध्यम से हाइड्रोजन को सुरक्षित रूप से स्टोर और ट्रांसपोर्ट करने में सक्षम है।
लैब परीक्षणों में यह पाया गया कि केवल 15.6 लीटर कैरियर लिक्विड में लगभग 11,000 लीटर हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है। यह प्रक्रिया सामान्यतः 170 डिग्री सेल्सियस पर होती है, लेकिन शोध टीम ने इसे मात्र 130 डिग्री सेल्सियस और 56 बार दबाव पर सफलतापूर्वक पूरा किया। डीहाइड्रोजनेशन चरण में 86 प्रतिशत हाइड्रोजन की रिकवरी भी हासिल की गई है।
रिसर्च एडवाइजर प्रो. दत्ता दांडगे ने कहा कि यह तकनीक हाइड्रोजन को किसी भी अन्य औद्योगिक लिक्विड की तरह परिवहन योग्य बनाती है, जिससे सुरक्षा मानकों और सरकारी नियमों से जुड़ी पुरानी बाधाएं दूर होंगी। इससे ट्रांसपोर्ट और बड़े उद्योगों के लिए क्लीन

