अभाविप राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन की शुरुआत प्रमुख भाषण व पाँच समानांतर सत्रों के साथ
देहरादून, 29 नवंबर। 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन की शुरुआत शनिवार को विचार-विमर्श और बौद्धिक मंथन से हुई। परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित इस अधिवेशन में देशभर से आए युवाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को उत्साहपूर्ण बना दिया।
भारतीय शिक्षा संकल्पना पर मुख्य उद्बोधन
प्रातःकाल आयोजित मुख्य भाषण सत्र में “शिक्षा की भारतीय संकल्पना: वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य एवं हमारी भूमिका” विषय पर अभाविप के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजशरण शाही ने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्य आधारित शिक्षा, आधुनिक चुनौतियों और शिक्षण पद्धति के परिमार्जन पर विस्तृत विचार रखे।
उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा केवल कौशल नहीं, बल्कि चरित्र, संवेदना और राष्ट्र निर्माण की नींव है। युवाओं को तकनीक और परंपरा के संतुलन के साथ नई दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
पाँच समानांतर सत्रों में समसामयिक विषयों पर गहन विमर्श
मुख्य सत्र के उपरांत पाँच समानांतर सत्र आयोजित हुए, जिनमें विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और छात्र प्रतिनिधियों ने विभिन्न महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों पर गहन चर्चा की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
वैश्विक Gen-Z आंदोलन एवं भारतीय युवा
AI, चैटजीपीटी एवं शिक्षा क्षेत्र पर प्रभाव
बांग्लादेशी घुसपैठ एवं SIR से संबंधित समसामयिक चुनौतियाँ
जनसंख्या असंतुलन एवं विकसित भारत लक्ष्य-2047
ऑपरेशन सिंदूर एवं बदलता राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य
इन चर्चाओं में युवाओं की भूमिका, नीति निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक संरचनाओं पर उभरती चुनौतियों के समाधान पर भी विचार प्रस्तुत किए गए।
अधिवेशन के दूसरे दिन की ये गतिविधियाँ न केवल ज्ञानवर्धक रहीं बल्कि भविष्य के युवा नेतृत्व को नए दृष्टिकोण और सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाली सिद्ध हुईं।
