उत्तराखण्डपर्यावरण

गौरा देवी के जन्म शताब्दी को खास बनाने की चल रही तैयारी

प्रदेश के हर डिवीजन में गौरा देवी स्मृति वन किया जाएगा स्थापित

देहरादून 07 जुलाई । उत्तराखंड के चिपको आंदोलन ने पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसी आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी के जन्म शताब्दी वर्ष को वन विभाग इस बार कुछ खास रूप में मनाने जा रहा है। विभाग ने निर्णय लिया है कि राज्य के हर डिवीजन में गौरा देवी स्मृति वन की स्थापना की जाएगी।
चिपको आंदोलन की अलख जगाने वाली गौरा देवी पर्यावरण संरक्षण का दूसरा नाम है। इस आंदोलन में पूरी दुनिया ने जाना की कैसे उत्तराखंड की महिलाएं पर्यावरण के साथ अपना गहरा संबंध बनाए हुए हैं। उत्तराखंड के लिए इसी लिहाज से यह वर्ष बेहद खास है, ऐसा इसलिए क्योंकि यह साल गौरा देवी जन्म शताब्दी के रूप में मनाया जा रहा है। उत्तराखंड वन विभाग ने भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस नाम को वन क्षेत्र में संजोकर रखने के लिए विशेष योजना तैयार की है।
प्रमुख वन संरक्षक हॉल उत्तराखंड वन विभाग ने गौरा देवी की स्मृति में राज्य के सभी डिवीजन में गौरा देवी स्मृति शताब्दी वन की स्थापना करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रत्येक डिवीजन में फलदार वृक्षों को लगाया जाएगा और एक वन के रूप में स्थापित कर इसे गौरा देवी स्मृति शताब्दी वन नाम दिया जाएगा।
खास बात यह है कि यह साल उत्तराखंड की राज्य स्थापना का 25वां वर्ष भी है, इस लिहाज से प्रदेश के लिए यह साल और भी अहम हो जाता है। वैसे तो उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण को लेकर देश का नेतृत्व करता है, लेकिन इस साल फलदार वृक्ष लगाकर इस साल को यादगार बनाया जा रहा है।
इस बार हरेला के आयोजन को भी इसी रूप में मनाने की तैयारी है और यह पूरा आयोजन भी गौरा देवी के नाम ही रहेगा। इस दौरान वन पंचायतों को वनों से जोड़ने और वनों के साथ उनके संबंध के बारे में भी बताया जाएगा। कुल मिलाकर आम लोगों का वनों से क्या ताल्लुक है, इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलेंगे। ताकि वनों का संरक्षण और संवर्धन केवल सरकार या विभाग की जिम्मेदारी तक ही ना रहे, बल्कि आम लोग भी इससे जुड़कर इसके संरक्षण को आगे आए।

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