उत्तराखण्डराज्यसहित्य

मुख्यमंत्री धामी ने किया राज्य आंदोलन के जननायक स्व. रणजीत सिंह वर्मा पर आधारित पुस्तक का विमोचन

बोले- रणजीत सिंह वर्मा का जीवन संघर्ष, सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा, राज्य आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बनाना ही होगी सच्ची श्रद्धांजलि

पुस्तक को बताया राज्य आंदोलन के संघर्ष और संकल्प का महत्वपूर्ण दस्तावेज, आने वाली पीढ़ियों को आंदोलनकारियों के त्याग और बलिदान से कराएगी परिचित

देहरादून 05 नवम्बर । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्वर्गीय रणजीत सिंह वर्मा के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखक एवं वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी तथा अजय वर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी राज्य और समाज का इतिहास केवल घटनाओं का विवरण नहीं होता, बल्कि उसमें उन लोगों के संघर्ष, संकल्प और त्याग की गाथाएं भी समाहित होती हैं, जिन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। यह पुस्तक केवल एक जननायक की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के संघर्ष और संकल्प का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इससे आने वाली पीढ़ियों को राज्य निर्माण के इतिहास और आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान को समझने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण दशकों के संघर्ष और असंख्य आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का परिणाम है। पृथक राज्य की स्थापना लाखों लोगों की आकांक्षाओं और जनभावनाओं की जीत थी। स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक उत्तराखण्ड की मांग को बुलंद करने, लोगों को एकजुट करने और आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने देहरादून में आंदोलन को सक्रिय बनाए रखा। बंद, चक्का जाम, जेल भरो और रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर उन्होंने पृथक राज्य की मांग को मजबूती प्रदान की। डोईवाला के प्रेमनगर बाजार स्थित अपनी ससुराल को भी उन्होंने आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया और पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया।

मुख्यमंत्री ने खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास के अत्यंत पीड़ादायक अध्याय हैं। अनेक कठिनाइयों और यातनाओं के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष को जारी रखा। उनके त्याग, संघर्ष और बलिदान का ही परिणाम रहा कि 9 नवंबर 2000 को उत्तराखण्ड देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. रणजीत सिंह वर्मा का राजनीतिक और सामाजिक जीवन भी उनकी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। वह अविभाजित उत्तर प्रदेश की मसूरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे, लेकिन उनके लिए पृथक उत्तराखण्ड राज्य का संकल्प सर्वोपरि था। राज्य गठन के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और स्वयं को सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित रखा। उनका जीवन सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता और निःस्वार्थ जनसेवा की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के साथ ही उनके सपनों को साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखण्ड बनाने का है, जहां युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, मातृशक्ति आत्मनिर्भर बने और विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण ही स्व. रणजीत सिंह वर्मा सहित राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले सभी आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए समस्त आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी, अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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