उत्तराखण्डराज्य

शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने का रोडमैप कुलपतियों को भेजा, 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती के निर्देश

डॉ. देवेंद्र भसीन ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर नशामुक्त परिसर बनाने और एंटी ड्रग कमेटियों के गठन का किया आग्रह

देहरादून,30 अक्टूबर। उत्तराखंड में शिक्षण संस्थानों को नशामुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. देवेंद्र भसीन ने प्रदेश के राजकीय एवं अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र भेजकर नशामुक्ति अभियान का रोडमैप साझा किया है। उन्होंने कुलपतियों से सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपने विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों को नशामुक्त बनाने के लिए प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

डॉ. भसीन ने कुलपतियों को भेजे पत्र में कहा है कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्ष 2029 तक देश और प्रदेश को नशामुक्त बनाने का अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में शिक्षण संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दृष्टि से शैक्षणिक संस्थानों को नशे के विरुद्ध अभियान की ‘पहली रक्षा पंक्ति’ बनाने का संकल्प लिया गया है।

उन्होंने बताया कि कुलपतियों को भेजे गए रोडमैप में केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा नशामुक्ति अभियान के तहत निर्धारित प्रमुख बिंदुओं को भी शामिल किया गया है। इसमें विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को नशामुक्त परिसर बनाने के साथ उनके आसपास बफर जोन विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों, तंबाकू और सिगरेट आदि की बिक्री पर सख्त निगरानी रखने और रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

रोडमैप में एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS) और ‘माई भारत’ (MY Bharat) के स्वयंसेवकों के माध्यम से बड़े स्तर पर नशामुक्ति मित्र तैयार करने का सुझाव दिया गया है। ये स्वयंसेवक अपने साथियों के बीच नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता फैलाने के साथ संवाद और जनजागरण का कार्य करेंगे।

इसके अतिरिक्त शिक्षण संस्थानों में पाठ्यक्रम के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों पर केंद्रित शिक्षा, कार्यशालाएं, वाद-विवाद और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों को मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

डॉ. भसीन ने कहा कि शिक्षकों और प्रशासकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों के व्यवहार में आने वाले बदलावों तथा नशे की शुरुआती लक्षणों को पहचान सकें और बिना किसी सामाजिक कलंक के उन्हें उचित मार्गदर्शन एवं सहायता उपलब्ध करा सकें।

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रोडमैप के तहत महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में ‘ड्रग-रोधी समितियों’ (Anti-Drug Committees) का गठन करने की बात भी कही गई है। ये समितियां परिसर और छात्रावासों में औचक निरीक्षण करने के साथ निरंतर जागरूकता अभियान संचालित करेंगी। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों को स्थानीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मान्यता प्राप्त नशामुक्ति केंद्रों से सीधे जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को तत्काल सहायता मिल सके।

डॉ. देवेंद्र भसीन ने आशा व्यक्त की कि प्रदेश के सभी कुलपति इस विषय की गंभीरता को समझते हुए रोडमैप के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग देश और समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को नशे से दूर रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। जहां एक ओर शिक्षण संस्थानों में जागरूकता और रोकथाम के प्रयास किए जाएंगे, वहीं दूसरी ओर नशे के तस्करों के विरुद्ध भी संबंधित सरकारी एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं।

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