हिंदी को रोजगार से जोड़ना होगा, तभी नई पीढ़ी का बढ़ेगा जुड़ाव : अमित श्रीवास्तव
दर्द गढ़वाली समेत आठ साहित्यकार सम्मानित, हिंदी साहित्य समिति ने हिंदी दिवस पर हिंदी भवन में आयोजित किया भव्य समारोह

देहरादून 20 सितम्बर । 


हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना और साहित्य की समृद्ध परंपरा की वाहक है। बदलते दौर में हिंदी को नई पीढ़ी और रोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है। जब हिंदी में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, तभी युवा पीढ़ी का हिंदी के प्रति आकर्षण और मजबूत होगा। यह बात रविवार को हिंदी साहित्य समिति की ओर से लैंसडौन चौक स्थित हिंदी भवन में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में वक्ताओं ने कही।
हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. रामविनय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में साहित्य, भाषा और हिंदी के व्यापक प्रसार को लेकर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दर्द गढ़वाली समेत आठ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आईआईपी के राजभाषा अधिकारी सोमेश्वर पांडेय ने सरकारी कार्यालयों में हिंदी में किए जा रहे कामकाज की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने तमिलनाडु और नागपुर में अपने कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने तमिल भाषियों को सरल एवं सहज तरीके से हिंदी सिखाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि भाषा को कठिन बनाने के बजाय सरल और व्यवहारिक बनाना जरूरी है, तभी उसका व्यापक प्रसार संभव है।
मुख्य अतिथि एसपी (सीआईडी) डॉ. अमित श्रीवास्तव ने हिंदी को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी पैटर्न तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिंदी को रोजगारपरक बनाए बिना नई पीढ़ी को इससे लंबे समय तक जोड़ना चुनौतीपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी के व्यापक बाजार को देखते हुए निजी कंपनियां भी हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही हैं। ऐसे में हिंदी को रोजगार और तकनीक से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
साहित्यकार डॉ. विद्या सिंह और डॉ. सुधा रानी पांडेय तथा वरिष्ठ पत्रकार असीम शुक्ल ने भी हिंदी में अधिक से अधिक काम करने और इसे जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रति सम्मान के साथ-साथ इसके व्यावहारिक उपयोग को भी बढ़ाना जरूरी है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. रामविनय सिंह ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं की महत्वपूर्ण पुस्तकों का हिंदी में और हिंदी साहित्य का अन्य भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए। इससे न केवल साहित्य का विस्तार होगा, बल्कि हिंदी भाषा भी नए शब्दों, विचारों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से और समृद्ध होगी।
साहित्यकारों का हुआ सम्मान
हिंदी दिवस समारोह में वरिष्ठ शायर योगेश्वर गौड़, डॉ. नीता कुकरेती, दर्द गढ़वाली, यामा शर्मा, कविता बिष्ट, मणि अग्रवाल ‘मणिका’, अनिता सोनी और कल्पना बहुगुणा को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रकाशक प्रवीण भट्ट को भी सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन वरिष्ठ शायर शादाब मशहदी ने किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राकेश बलूनी ने आयोजन में सहयोग दिया, जबकि समिति के महामंत्री हेमवती नंदन कुकरेती ने सभी अतिथियों और साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार केडी शर्मा, इक़बाल आज़र, अंबर खरबंदा, राकेश जैन, राजेश आनंद असीर, माहेश्वरी कनेरी, भारती आनंद, वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसाईं, नूतन स्मृति, संगीता शाह, मोनिका मंतशा, राजेश अरोड़ा, रजनीश त्रिवेदी, रवीन्द्र सेठ, नरेंद्र शर्मा समेत बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।


