उत्तराखण्डधर्म-संस्कृति

देर रात ठंड का प्रतीक पुतले ख्तूड़वा का किया जाता है दहन,प्रसाद के रूप में बाँटी जाती है ककड़ी: हर्षित जोशी

नैनीताल 17 सितम्बर । सरोवर नगरी उसके आसपास समेत जनपद नैनीताल व पूरे उत्तराखंड में आज से ठंड का प्रकोप जारी हो गया है। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता व छात्र हर्षित जोशी ने बताया ।ठंड से बचने के लिये आज के दिन अधिकांश क्षेत्रों में एक पुतला (ख्तूड़वा) बनाया जाता है। जिसका देर रात दहन कर ककड़ी का प्रसाद बांटा जाता है।

श्री जोशी ने कहा इस पर्व का मूल संदेश यह है कि पशुधन हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन की रीढ़ हैं। आग जलाकर नकारात्मक ऊर्जा, दुष्ट आत्माओं और बीमारियों (जो ख्तूड़वा के प्रतीक हैं) को भगाया जाता है और गायों-बैलों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
​पहाड़ी ककड़ी का विशेष प्रसाद ख्तूड़वा जलाने के बाद अग्नि में नई ककड़ी का भोग लगाया जाता है, जिसे प्रसाद के रूप में बांटकर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
उन्होंने कहा आज से ठंड की शुरुआत हो गयी है। इसका प्रमुख कारण यह भी है।
वर्षा ऋतु के समाप्त होने तथा शरद ऋतु के प्रारंभ में यानी आश्विन माह के प्रथम दिन (कन्या संक्राति) को मनाया जाने वाला यह उत्तराखंड के सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में ही मनाया जाता है।

पर्वतीय क्षेत्रों के भू भाग में मनाए जाने वाला यह त्यौहार मूल रूप से गायों को समर्पित है। क्योंकि पर्वती भू भाग में कोई बड़े उद्योग धंधे ना होने के कारण वहां पर लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती करना व पशु पालना ही है।उनका पूरा जीवन इन्हीं दो चीजों पर आधारित है। या यूं कह सकते हैं कि किसान की सबसे अमूल्य संपत्ति उसका पशु और उसकी भूमि ही होती है। इसीलिए इन जगहों पर प्रकृति और पशुओं से संबंधित अनेक त्यौहार समय-समय पर या ऋतु परिवर्तन केवक्त मनाए जाते हैं। जिनके कई वैज्ञानिक आधार भी हैं। लेकिन उन त्योहारों को एक लोक पर्व के रूप में मनाया जाता है।
यह भी माना जाता है ठंडे स्थानों में आज से रजाई और साथ गर्म कपड़ों को पहनने व ओढ़ने का सिलसिला जारी हो जाता है। पहाड़ो में इस समय धान कटाई के साथ साथ घास कटाई का कार्य भी जोर शोर से किया जाता है।
इस अवसर पर निहर गोस्वामी ने पुतले ख्तूड़वा का मुखोटा बनाया। जबकि ललित गोस्वामी, शिक्षिका विमलेश गोस्वामी, कृष्णा गोस्वामी,पूर्व प्रधानाचार्य कमला उप्रेती, सुशीला जोशी, आनन्दी आर्या,के अलावा ममता जोशी, भगवती बिष्ट, ज्योत्सना, हेमा पांडे, कलावती देवी , प्रेमा देवी, कनिष्का, दिव्यांसु,कृष्णा, भावेश,दक्षु समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button