शोध, नवाचार और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा पर दें विशेष ध्यान: राज्यपाल
देहरादून,
13 अगस्त 2026। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार, उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध, नवाचार और भविष्य की तकनीकों पर विशेष फोकस करना होगा।
राज्यपाल गुरुवार को लोक भवन में उत्तराखण्ड के स्व वित्तपोषित (निजी) विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ आयोजित दूसरे चरण की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में 14 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, भावी योजनाओं और चुनौतियों से राज्यपाल को अवगत कराया।
बैठक में अनुसंधान को बढ़ावा देने, पेटेंट संस्कृति विकसित करने, पेटेंट के व्यावसायीकरण, उद्योग-अकादमिक सहयोग, राष्ट्रीय स्तर पर साझा शोध व्यवस्था तथा विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण सुझावों पर चर्चा हुई।
राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाएं और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को सही दिशा देने की है। नशे जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वविद्यालयों में नशामुक्त और सकारात्मक वातावरण के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संस्कार, परंपराओं और चरित्र निर्माण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में शिक्षा के सामने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मेटावर्स, सेमीकंडक्टर, स्पेस एवं साइबर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों की चुनौतियां हैं। विश्वविद्यालय इन क्षेत्रों में अध्ययन और अनुसंधान को बढ़ावा दें। उन्होंने रिसर्च, पब्लिकेशन और साइटेशन पर विशेष ध्यान देने के साथ ही पेटेंट को केवल दर्ज कराने तक सीमित न रखने और उनके व्यावसायीकरण की दिशा में ठोस प्रयास करने को कहा।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को उत्तराखण्ड की आवश्यकताओं और संभावनाओं के अनुरूप शोध के विषय चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शोध के विषय ऐसे हों, जिनका प्रदेश के विकास में प्रत्यक्ष योगदान हो। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों को अपनी पहचान और विरासत को संरक्षित करने के लिए संस्थापक एवं विश्वविद्यालय के इतिहास पर पुस्तक प्रकाशित करने, विश्वविद्यालय की यात्रा पर फिल्म बनाने तथा कॉफी टेबल बुक तैयार करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय आपसी सहयोग और समन्वय से मजबूत अकादमिक एवं शोध इकोसिस्टम विकसित करें। विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उनका लाभ विद्यार्थियों, समाज, उद्योग और प्रदेश के विकास तक पहुंचे।
बैठक में राज्यपाल के विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, अपर सचिव राज्यपाल श्रीमती रीना जोशी सहित संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।