नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा का समावेश समय की आवश्यकता : राज्यपाल गुरमीत सिंह

देहरादून,
18 जुलाई। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत युवाओं को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विश्वगुरु बनने के लक्ष्य को संस्कारवान युवा ही साकार कर सकते हैं।
शनिवार को लोक भवन में राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा आयोजित ‘नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्था के सदस्यों को सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद और ऋषि-मुनियों की शिक्षाएं नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। सत्य, ईमानदारी, निष्ठा और आत्मानुशासन जैसे मूल्य ही मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार में उतारना आवश्यक है। यह उपदेश से नहीं, बल्कि उदाहरण से सीखी जाती है।
उन्होंने राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सदस्यों से विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सेवा भावना और चरित्र निर्माण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि पूर्व सैनिकों के अनुभव का उपयोग शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व विकास और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संस्था के ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक मूल्यों के प्रसार और युवाओं में राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल टी.पी. त्यागी, लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी बक्शी, मेजर जनरल जी.के. थपलियाल, प्रो. नीलम पंवार, राजन छिब्बर, मेजर जनरल ओ.पी. सोनी सहित राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारी, पूर्व सैनिक, शिक्षाविद् और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



