विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: सीमांत गांवों की संस्कृति और विकास से रूबरू हुए देशभर के युवा स्वयंसेवक

देहरादून, 7 जून। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामलों के विभाग द्वारा संचालित मेरा युवा भारत (माय भारत) के अंतर्गत आयोजित विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) 2026 के प्रथम चरण में देशभर से आए युवा स्वयंसेवकों ने उत्तराखंड के सीमांत जनपदों चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं तथा विकास गतिविधियों का अनुभव किया।
कार्यक्रम के तहत चमोली जिले के माणा, बामनी और गजकोटी गांवों में मॉडल ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया, जहां विभिन्न राज्यों से पहुंचे स्वयंसेवकों ने सीमांत क्षेत्रों की साझा सांस्कृतिक विरासत और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को करीब से देखा। ग्राम सभाओं के माध्यम से युवाओं को स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण विकास और सामुदायिक सहभागिता की जानकारी दी गई।
पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांव नाबी में पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, पंजाब और कर्नाटक से आए प्रतिभागियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में ग्राम प्रधान कुमारी छभिता नबियाल, जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्य एवं राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) अशोक सिंह नबियाल, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता धीरज सिंह नबियाल तथा व्यास ऋषि मेला समिति के अध्यक्ष मदन सिंह नबियाल ने युवाओं से संवाद किया। वक्ताओं ने नाबी गांव के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और संभावनाओं से अवगत कराया।
उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के निकट भैरवघाटी क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और माय भारत के संयुक्त तत्वावधान में युवा स्वयंसेवकों ने स्वच्छता अभियान चलाया। इसके साथ ही युवाओं ने प्राकृतिक वातावरण के बीच योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए देशभर से 500 माय भारत स्वयंसेवकों का चयन किया गया है। इनका चयन राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से हुआ, जिसमें तीन लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया था। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयंसेवकों को लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चिन्हित सीमावर्ती गांवों में दो चरणों में तैनात किया जा रहा है। प्रथम चरण में 250 स्वयंसेवक 43 गांवों में गतिविधियों में भाग ले रहे हैं, जबकि शेष 250 स्वयंसेवक इस माह के अंत में 50 गांवों में आयोजित दूसरे चरण के कार्यक्रमों से जुड़ेंगे।
सात दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों को सीमा जागरूकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक जीवन, ग्राम विकास, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता से संबंधित गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत “नेशन फर्स्ट चैलेंज” अभियान का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जो जिम्मेदार नागरिकता और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।



