उत्तराखण्डधर्म-कर्म

भगवान के प्रकट होते ही प्रकृति निर्मल हो गई

कलियुग में भागवत कथा ही ईश्वर से जुड़ने का सबसे सरल उपाय

श्रीमद्भागवत को साक्षात् भगवान का स्वरूप माना गया
श्रीमद्भागवत महापुराण सनातन धर्म में सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है

देहरादून 7 मई । विकास लोक सहस्त्रधारा रोड पर जयसवाल निवास पर हो रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस के प्रसंग में जड़ भरत प्रहलाद चरित्र, वामन, गंगा अवतरण जैसे प्रसंगों का वर्णन किया तत्पश्चात श्री कृष्ण अवतार की कथा वर्णन किया सारा पंडाल खुशी से झूम उठे सुप्रसिद्ध कथा व्यास सुभाष जोशी द्वारा विस्तार से बताया ,
श्रीमद्भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। श्रीमद्भागवत महापुराण, महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित एक सर्वोच्च वैष्णव पुराण है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति और भगवान की कृपा का मार्ग दिखाता है। श्रीमद्भागवत को साक्षात् भगवान का स्वरूप माना गया है, जिसे श्रद्धापूर्वक सुनने से ही परम आनंद की प्राप्ति होती है। कलियुग में भागवत कथा ही ईश्वर से जुड़ने का सबसे सरल उपाय है, जो जीवन को सार्थकता प्रदान करती है। भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए आत्मा तृप्ति नहीं होती है।
श्रीमदभागवत साक्षात कल्पवृक्ष है। यह शब्द रूप में स्वयं श्रीकृष्ण हैं। इसलिए इसके श्रवण से मोक्ष मिल जाता है। इस आयोजन का सौभाग्य जन्म जन्मांतर के पुण्यों से प्राप्त होता है। जिस प्रकार से सूर्य संपूर्ण सृष्टि में अंधकार का नाश कर प्रकाश का प्रादुर्भाव करता है उसी प्रकार श्रीमद् भागवत महापुराण मनुष्य के मन में व्याप्त अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश करता है।
भागवत सप्ताह एक अनुष्ठान है। ईश्वर की अनुकम्पा होने पर ही सत्संग का लाभ मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा कृष्ण भगवान की शब्दावली है। जिसमें सभी पुराण, चारों वेदों तथा छह शास्त्रों का संपूर्ण ज्ञान इस भागवत महापुराण में अंकित है। भागवत श्रवण मन को पवित्र करने का एक मात्र उपाय है। लाखों पुण्यों तथा सद्कर्म के बाद ही व्यक्ति के मन में भागवत कथा सुनने की इ’छा जागृत होती है। भागवत सुनने के लिए आकाश में देवता आकर स्थिर हो जाते हैं और भागवत श्रवण करते हैं, क्योंकि यह सौभाग्य स्वर्गलोक में नहीं है। जिसे भागवत श्रवण का अवसर नहीं मिलता उसका जीवन पशुतुल्य है।
क्षेत्रवासियों ने इस सुंदर संगीतमय भागवत कथा का रसपान किया। इस दौरान श्रीमती आशा एवं अनिल कुमार जायसवाल, श्रीमती पूजा एवं मनोज कुमार जायसवाल, श्रीमती पूजा एवं मनीष कुमार जायसवाल, श्रीमती श्रद्धा एवं आशीष कुमार जायसवाल, सिद्धांत, अभिनव, आर्यन, अनुरूध, यर्थाथ अनुष्का एवं भैवभव कुमार जायसवाल व क्षेत्रवासी उपस्थित रहे व आए हुए अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया।
कथा के उपरांत टपकेश्वर महादेव मंदिर के दिगंबर भारत गिरी जी का आशीर्वाद भी सभी भक्तों को प्राप्त हुआ

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