श्लोक, नृत्य और नाटक में दिखी समृद्ध भारतीय संस्कृति
संस्कृत प्रतियोगिता में छात्रों ने दिखाई अपनी प्रतिभा
छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों में दिखे संस्कार और परंपरा के रंग
देहरादून 07 अक्टूबर ।
मंच पर गूंजते संस्कृत श्लोक, संवादों में झलकती भारतीय परंपरा और नृत्य की भाव-भंगिमाओं में दिखाई देते संस्कार। जनपद स्तरीय संस्कृत छात्र प्रतियोगिता में छात्रों ने संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। नाटक में द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, नृत्य में पीएमश्री राजकीय बालिका इंटर कालेज राजपुर रोड और समूह गान में श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय देहरादून ने प्रथम स्थान हासिल किया।
उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में देहरादून के छह विकासखंडों के कनिष्ठ वर्ग के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। श्लोकोच्चारण, आशुभाषण, वाद-विवाद, संस्कृत गीत, नाटक और नृत्य में छात्रों ने संस्कृत की समृद्ध परंपरा और भारतीय जीवन-मूल्यों की झलक दिखाई। नाटक में द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय प्रथम, कन्या गुरुकुल महाविद्यालय द्वितीय और कैंट कन्या इंटर कालेज गढ़ी कैंट तृतीय स्थान पर रहा। नृत्य में पीएमश्री राजकीय बालिका इंटर कालेज राजपुर रोड प्रथम, अशोक आश्रम चिलियो कटापत्थर द्वितीय और कैंट कन्या इंटर कालेज गढ़ी कैंट तृतीय स्थान पर रहा। समूह गान में श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय प्रथम,द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय द्वितीय और अशोक आश्रम चिलियो कटापत्थर तृतीय स्थान पर रहा। वाद-विवाद में श्रीमद दयानंद ज्योतिर्मठ गुरुकुल पौंधा के अर्जित नारायण उनियाल प्रथम, श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय के शुभम आर्य द्वितीय और श्री जयराम संस्कृत महाविद्यालय ऋषिकेश के सिद्धार्थ नौटियाल तृतीय स्थान पर रहे। श्लोक उच्चारण में श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय के आदित्य भट्ट प्रथम, श्री नेपाली संस्कृत विद्यालय ऋषिकेश के रिहान शर्मा द्वितीय और श्री शिवनाथ संस्कृत महाविद्यालय के आशु नौटियाल तृतीय स्थान पर रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ टपकेश्वर महादेव मंदिर के श्री कृष्ण गिरी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष जोशी और संस्कृत शिक्षा के सहायक निदेशक डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। श्री कृष्ण गिरी महाराज ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों की आधारशिला है। जनपद संयोजक आचार्य मनोज शर्मा ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं छात्रों को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ उनके आत्मविश्वास , सृजनात्मकता, वाक्-कौशल और मंचीय प्रतिभा को निखारती हैं। कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्याम अग्रवाल, मनोज किशोर पंत, डा. शैलेंद्र डंगवाल, डा. सीमा,संतोष विद्यालंकर, श्री महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा ,डा. जीवन जोशी, अंजू श्रीवास्तव, बबीता धीमान, सूर्य प्रकाश रतूड़ी, सुभाष डोभाल और डा. भानु उनियाल समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।