देहरादून नियो मेट्रो का सपना दिखाकर DPR, कंसल्टेंसी और सर्वे के नाम पर 90 करोड़ से अधिक स्वाहा
अब 24 मीटर लंबी बस को नया मॉडल बताकर जनता को गुमराह कर रही धामी सरकार : आम आदमी पार्टी
देहरादून 23 सितम्बर 2026 ।आम आदमी पार्टी उत्तराखंड ने देहरादून में नियो मेट्रो परियोजना को लेकर धामी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि वर्षों तक प्रदेश की जनता को देहरादून में नियो मेट्रो चलाने का सपना दिखाया गया, इसके लिए DPR, कंसल्टेंसी, सर्वे और अन्य तैयारियों के नाम पर सरकारी धन खर्च किया गया, लेकिन आज स्थिति यह है कि नियो मेट्रो की योजना आगे बढ़ने के बजाय सरकार 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस चलाने की बात कर रही है।
आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि अंततः सरकार को ई-बस अथवा ई-BRTS व्यवस्था की ओर ही जाना था, तो नियो मेट्रो के नाम पर वर्षों तक की गई कवायद और उस पर खर्च किए गए सार्वजनिक धन की जवाबदेही किसकी है?
आम आदमी पार्टी के अनुसार, उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में UKMRC की ओर से नियो मेट्रो के लिए DPR और विभिन्न तकनीकी गतिविधियों पर लंबे समय से काम किए जाने का उल्लेख है। UKMRC की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के मुताबिक देहरादून में ISBT-गांधी पार्क और FRI-रायपुर के दो कॉरिडोर वाली Metro Neo DPR को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 8 मई 2025 को वापस कर दिया था और देहरादून की यातायात जरूरतों को ई-बस तथा BRTS जैसे अपेक्षाकृत कम लागत वाले विकल्पों से पूरा करने की बात कही गई थी।
पार्टी ने कहा कि जनवरी 2026 में UKMRC बोर्ड ने भी Metro Neo के स्थान पर e-BUS/e-BRTS के प्रस्ताव को सिद्धांततः स्वीकार किया। ऐसे में सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियो मेट्रो परियोजना के नाम पर अब तक कुल कितनी धनराशि खर्च हुई, किस-किस एजेंसी या कंसल्टेंसी को भुगतान किया गया और DPR, सर्वे तथा तकनीकी अध्ययन पर कितना-कितना पैसा खर्च हुआ।
आप ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में वर्ष 2023 से देहरादून के विभिन्न प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए ट्रैफिक-ट्रांसपोर्टेशन स्टडी, टोपोग्राफिकल सर्वे और जियो-टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए UKMRC द्वारा निविदाएं भी जारी की गई थीं।
“पहले नियो मेट्रो, अब 24 मीटर बस—सरकार बताए जनता का पैसा कहां गया?”
आम आदमी पार्टी ने कहा कि आज सरकार 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस को देहरादून की परिवहन व्यवस्था के नए समाधान के तौर पर प्रस्तुत कर रही है। हालिया रिपोर्टों में भी नियो मेट्रो के स्थान पर 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस चलाने की योजना सामने आई है।
जबकि पूर्व में भी राज्य सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक बस सेवा शहर में संचालित की जा रही है और समय समय पर बस संचालन में विभाग द्वारा घाटे की बात कही जाती रही है, कई बार तो विभाग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक बस संचालन को बजट ना होने पर रोकना तक पड़ा है।
ऐसे में 24मीटर लंबी इलेक्ट्रॉनिक बस को सरकार कैसे संचालित करेगी।
पार्टी ने कहा कि ई-बस चलाना या सार्वजनिक परिवहन के किसी वैकल्पिक मॉडल पर विचार करना अपने आप में मुद्दा नहीं है, लेकिन जनता के पैसे से वर्षों तक जिस परियोजना का प्रचार किया गया, उसके अचानक बदल जाने पर सरकार को पूरी वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही देनी होगी।

