उत्तराखण्डराजनीति

अंकिता के हत्यारों की जमानत खारिज होना ठोस पैरवी और दुष्प्रचार पर चोट: चौहान

बेटी अंकिता को न्याय दिलाने के लिए मजबूती से खड़ी है धामी सरकार

दिवंगत बेटी को मिले न्याय को पचा नही पा रही कांग्रेस, राजनैतिक अवसर की तलाश दुर्भाग्यपूर्ण

देहरादून 19 अगस्त । भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपियों की हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने को ठोस पैरवी और पूर्व मे की गयी विवेचना का नतीजा बताते हुए कहा कि इससे कांग्रेस के द्वारा किये जा रहे दुष्प्रचार को भी चोट पहुंची है।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरोपी जिस दिन 25 सितंबर 2022 को जेल गए तब से बाहर नही आ पाए और यह प्रभावी पैरवी का ही नतीजा है। यह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटी अंकिता को न्याय दिलाने और दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा सुनिश्चित करने के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है।

उन्होंने कहा कि घटना सामने आने के बाद 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान सहित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार मजबूती से पैरवी से आरोपियों को राहत नही मिल सकी।

चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया के दौरान अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परिजनों की मांग के अनुरूप तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। इतना ही नहीं, अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए। वहीं सरकार ने परिवार को संबल प्रदान करने के लिए 25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के भाई और उनके पिता को नौकरी प्रदान कर परिवार के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा किया।

चौहान ने कांग्रेस के द्वारा पूरे प्रकरण मे संवेदनहीनता बरतने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों के कार्यों पर तमाम सवाल उठाती रही कांग्रेस ने आरोपों से संबंधित तथ्य न जांच एजेंसियों को मुहैया कराये और न ही अदालत को बताये। इससे उसका मकसद साफ था कि किसी भी तरह राजनैतिक दुष्प्रचार के जरिये इसे अवसर मे तब्दील करना था। हालांकि जनता की अदालत मे उसे बार बार मुँह की खानी पड़ी और वह अपने एजेंडे मे कामयाब नही हो पायी। कांग्रेस को अब अंकिता के मामले मे दुष्प्रचार के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

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