खाद्य सुरक्षा योजना का केंद्रीय लक्ष्य लगभग 100 फीसदी पूरा कर रहा है उत्तराखंड!
शहीद और पूर्व सैनिक परिवारों के लिए 42 एमबीबीएस और 2 बीडीएस सीटें आरक्षित!
देहरादून 11 अगस्त। उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा निर्धारित लक्ष्य को लगभग 100 फीसदी पूरा कर रहा है। संसद में दी गई जानकारी में केंद्र ने बताया कि पूर्व सैनिक और शहीद परिवारों के लिए 42 एमबीबीएस और 2 बीडीएस सीटें आरक्षित की गया है, साथ ही विगत 3 वर्षों में अब तक कुल 843 करोड़ रुपए की मदद उनके लाभार्थियों को दी गई हैं।
राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट ने सदन में पूर्व सैनिकों और शहीद आश्रितों के कल्याण हेतु कार्यान्वित योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। जिसके जवाब में रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने कहा कि केंद्रीय सैनिक बोर्ड यानी केसीबी और पुनर्वास महानिदेशालय के माध्यम से भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं, युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं और उनके पात्र आश्रितों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन होता है। केएसबी, सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष के माध्यम से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से दरिद्रता अनुदान, शिक्षा अनुदान, दिव्यांग बाल अनुदान, पुत्री विवाह अनुदान, विधवा पुनर्विवाह अनुदान, चिकित्सकीय उपचार अनुदान, अनाथ अनुदान, विधवाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण अनुदान, गंभीर और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए अनुदान, दिव्यांग भूतपूर्व सैनिकोंको मॉडिफाइड स्कूटर खरीदने के लिए अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता देता है और गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी प्रदान करता है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना के तहत, पाठ्यक्रम की पूरी अवधि के लिए योग्यता के आधार पर पात्र बच्चों को प्रति वर्ष 5500 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। केएसबी भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्स्थापन में शामिल संस्थानों जैसे कि किर्की और मोहाली में पैराप्लेजिक पुनर्स्थापन केन्द्र, देहरादून में अखिल भारतीय गोरखा भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ, लखनऊ, देहरादून और दिल्ली में चेशायर होम और 36 युद्ध स्मारक छात्रावासों को भी वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
केंद्र द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा कार्मिकों के बच्चों के लिए 42 एमबीबीएस और 3 बीडीएस सीटों का आरक्षण भी किया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के विगत तीन वर्षों के दौरान लाभार्थियों को वितरित सन्निकट राशि क्रमशः 364.47 करोड़ रुपए, 370.16 करोड़ रुपए और 169.65 करोड़ रुपए है। पुनर्वास निदेशालय यानी डीजीआर, अखिल भारतीय स्तर पर भूतपूर्व सैनिकों, दिव्यांग सैनिकों, विधवाओं और उनके आश्रितों के लिए कई पुनर्वास योजनाएं और कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है ताकि उनकी इच्छा, पात्रता मानदंडों को पूरा करने और रिक्तियों की उपलब्धता के आधार पर रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकें। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि के दौरान डीजीआर की योजनाओं से लाभान्वित होने वाले भूतपूर्व सैनिकों की संख्या क्रमशः 55516, 60816 और 69397 है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि के दौरान डीजीआर की कौशल विकास पहलों के तहत प्रशिक्षित अधिकारियों, जेसीओ और अन्य रैंकों की संख्या क्रमशः 9123, 11588 और 16901 है। इसके अलावा, भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना यानी ईसीएचएस सरकार की एक विशेष पहल है जो भूतपूर्व सैनिकों और उनके पात्र आश्रितों को नकदरहित और सीमारहित चिकित्सीय उपचार प्रदान करती है। ईसीएचएस, देश भर में फैले हुए 30 क्षेत्रीय केंद्रों और 448 पॉलीक्लिनिकों के माध्यम से संचालित होता है।
वहीं उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग से जुड़े एक सवाल के ज़बाब में राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने बताया कि उत्तराखंड खाद्यसुरक्षा योजना के अंतर्गत लगभग सौ फीसदी लक्ष्य पूरा कर रहा है। उनके अनुसार 16 जुलाई 2026 तक राज्य सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निर्धारित 61.94 लाख लाभार्थियों के लक्षित कवरेज की तुलना में 60.06 लाख लाभार्थियों की पहचान की है। अधिनियम के अंतर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का प्रचालन केंद्र तथा राज्य सरकार की संयुक्त जिम्मेदारी के अंतर्गत किया जाता है। जिसमें निर्धारित कवरेज सीमा के भीतर लाभार्थियों की पहचान तथा उनके राशन कार्ड संबंधित राज्य जारी करता है। राज्य अपने लाभार्थी डाटाबेस को अद्यतन करते हैं ताकि अपात्र राशन कार्ड हटाए जा सकें और पात्र लाभार्थियों का बेहतर लक्ष्यांकन सुनिश्चित किया जा सके। इस प्रकार, अधिनियम के तहत अपात्र लाभार्थियों को हटाना और पात्र लाभार्थियों को जोड़ना एक सतत प्रक्रिया है।