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खाकी से खेती तक: राष्ट्रपति पदक विजेता गोपाल बिष्ट जैविक खेती से बन रहे नई पीढ़ी की प्रेरणा

भीमताल/भवाली 27 मई। देश और समाज की सेवा केवल वर्दी तक सीमित नहीं होती, यह बात भवाली (भीमताल) निवासी गोपाल बिष्ट ने अपने जीवन से साबित कर दिखाई है। उत्तराखंड अग्निशमन सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद जहां अधिकांश लोग आरामदायक जीवन चुनते हैं, वहीं गोपाल बिष्ट ने अपनी जन्मभूमि और प्रकृति से जुड़कर समाज को नई दिशा देने का कार्य शुरू किया। आज वे जैविक खेती के माध्यम से न केवल शुद्ध फल और सब्जियां तैयार कर रहे हैं, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं।
भवाली क्षेत्र में गोपाल बिष्ट पूरी तरह पारंपरिक और केमिकल-मुक्त खेती कर रहे हैं। उनकी खेती में उगाई जा रही सब्जियां और फल शुद्धता और गुणवत्ता के कारण स्थानीय लोगों के बीच खास पहचान बना चुके हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने के लिए जैविक खेती ही सबसे बेहतर विकल्प है।
गोपाल बिष्ट का अग्निशमन सेवा का कार्यकाल भी उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने वर्षों तक अपनी कर्तव्यनिष्ठा और साहस के बल पर लोगों की जान-माल की रक्षा की। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2022 में गृह मंत्रालय के अधीन अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड द्वारा उन्हें उत्कृष्ट अग्निशमन सेवाओं के लिए प्रशंसा एवं कांस्य डिस्क सम्मान प्रदान किया गया। वहीं वर्ष 2015 में उत्तराखंड अग्निशमन सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन और समर्पित सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति अग्निशमन सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
सेवानिवृत्ति के बाद भी गोपाल बिष्ट समाज सेवा में सक्रिय हैं। गर्मियों के दौरान जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को लेकर वे लगातार स्थानीय लोगों को जागरूक करते हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। उनका कहना है कि जंगल केवल प्रकृति की धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी हैं।
गोपाल बिष्ट आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो नौकरी के बाद जीवन को केवल आराम तक सीमित मानते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण हो तो व्यक्ति हर उम्र में बदलाव की मिसाल बन सकता है।

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