आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर का लोकार्पण, भिक्षावृत्ति व बालश्रम से मुक्त बच्चों को मिला नया जीवन

देहरादून,24 मार्च 2026। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जिला प्रशासन देहरादून की महत्वाकांक्षी परियोजना “आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर” का विधिवत लोकार्पण कर इसे जनमानस को समर्पित किया। साधुराम इंटर कॉलेज, राजा रोड देहरादून में लगभग 157.60 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र राज्य का पहला ऐसा आधुनिक संस्थान है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम में संलिप्त बच्चों का पुनर्वास कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
यह केंद्र मुख्यमंत्री के भिक्षावृत्तिमुक्त राज्य के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। यहां रेस्क्यू किए गए बच्चों के समग्र विकास के लिए योग, संगीत, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से मानसिक एवं व्यवहारिक सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन के इस प्रयास ने एक वर्ष के भीतर ही उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अब तक 325 से अधिक बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम से मुक्त कराया गया है, जबकि 200 से अधिक बच्चों का विद्यालयों में नामांकन कराया जा चुका है।
भिक्षावृत्ति और बालश्रम उन्मूलन के लिए जिला प्रशासन ने एक अंतरविभागीय टीम गठित की है, जिसमें होमगार्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, पुलिस और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों को शामिल किया गया है। यह टीम समन्वय के साथ लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही है।
शहर में अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 3 विशेष रेस्क्यू वाहनों की तैनाती की गई है, जो नियमित पेट्रोलिंग कर बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचा रहे हैं। साथ ही प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर 16 होमगार्ड कर्मियों को भी तैनात किया गया है।
जिलाधिकारी द्वारा कार्यभार संभालने के बाद इस परियोजना को प्राथमिकता दी गई और दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री द्वारा इसका शिलान्यास किया गया। वर्तमान में यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होकर संचालित हो रहा है, जहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था दी जा रही है।
जिला प्रशासन का यह अभिनव प्रयास न केवल भिक्षावृत्ति और बालश्रम उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि वंचित बच्चों को बेहतर भविष्य देने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।



