लोकसभा में उठी पर्वतीय पर्यटन परिपथों के विकास की मांग, उत्तराखंड को भी मिल रहा लाभ: अजय भट्ट

देहरादून/नई दिल्ली 23 मार्च । अजय भट्ट ने लोकसभा में पर्वतीय पर्यटन को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से सवाल किया कि क्या देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पर्वतीय पर्यटन परिपथों के विकास की कोई योजना है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि प्रारंभिक रूप से चिन्हित पांच राज्यों में क्या उत्तराखंड को शामिल किया गया है और इन राज्यों के लिए स्वीकृत निधि व विकास कार्यों का विवरण क्या है।
इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि पर्यटन स्थलों का विकास मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है, जबकि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान कर इन प्रयासों को सुदृढ़ करती है।
मंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2014-15 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना के तहत हिमालयन थीम सहित विभिन्न पर्यटन परिपथों के विकास के लिए देशभर में 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इस योजना को अब उन्नत रूप में स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत 53 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
इसके अतिरिक्त प्रशाद योजना और चुनौती आधारित गंतव्य विकास (CBDD) जैसी योजनाओं के तहत भी पर्यटन अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने “विशेष सहायता योजना” के तहत 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपये की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर सहित अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में विश्वस्तरीय ट्रैकिंग और हाइकिंग ट्रेल्स विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
उत्तराखंड में चल रही प्रमुख पर्यटन परियोजनाएं:
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में विभिन्न योजनाओं के तहत कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित हैं—
टिहरी झील क्षेत्र में इको-टूरिज्म व एडवेंचर गतिविधियों के विकास हेतु 69.17 करोड़ रुपये
चंपावत में टी गार्डन एक्सपीरियंस के लिए 19.89 करोड़ रुपये
गुंजी (पिथौरागढ़) में ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर हेतु 17.86 करोड़ रुपये
जादूंग में विकास कार्यों के लिए 4.99 करोड़ रुपये
कैची धाम के विकास के लिए 17.60 करोड़ रुपये
माणा गांव में ‘जीवंत ग्राम’ योजना के तहत 4.99 करोड़ रुपये
इसके अलावा धार्मिक एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए—
ऋषिकेश में राफ्टिंग बेस स्टेशन के लिए 100 करोड़ रुपये
केदारनाथ विकास हेतु 34.77 करोड़ रुपये
बद्रीनाथ तीर्थ सुविधाओं के लिए 56.15 करोड़ रुपये
गंगोत्री व यमुनोत्री में तीर्थ सुविधाओं के लिए 54.56 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उत्तराखंड सहित देश के पर्वतीय राज्यों में पर्यटन अवसंरचना को सशक्त करने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है।



