विरासत कला उत्सव के तीसरे दिन ‘माई लाइफ, माई वे’ ने दर्शकों को किया भावुक

देहरादून 15 मार्च । 
लेखक गाँव, थानों में आयोजित सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” के तीसरे दिन मंचित नाटक “माई लाइफ, माई वे” ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। रिश्तों के टूटने की पीड़ा, अकेलेपन की कसक और जीवन को नए सिरे से जीने के साहस की कहानी पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) और लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में रविवार को मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) राकेश सुंदरियाल, कुलपति स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, उत्तराखंड ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नाटक की परिकल्पना केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा की थी, जबकि इसका लेखन गुरमीत पनाग और निर्देशन संगीता गुप्ता ने किया।
नाटक की कहानी कनाडा में रहने वाली पवलीन नामक महिला के जीवन के उतार-चढ़ाव पर आधारित है। पवलीन की शादी व्यवसायी अरविंद से होती है और दोनों का जीवन सुखद रूप से बीत रहा होता है। उनके दो बच्चे सावन और रोशनी भी हैं। लेकिन एक दिन पवलीन को पता चलता है कि अरविंद का ईशा नाम की युवती के साथ संबंध है। इस सच्चाई के सामने आने पर अरविंद घर छोड़ देता है और पवलीन का जीवन अकेलेपन से घिर जाता है।
इसी दौरान किशोरावस्था में पहुंचे उसके बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं और भारतीय संस्कृति में पली-बढ़ी पवलीन तथा कनाडाई जीवनशैली में ढले बच्चों के बीच सोच का अंतर कहानी को नया आयाम देता है। जीवन के इसी मोड़ पर फेसबुक के माध्यम से पवलीन की मुलाकात अपनी 20 वर्ष पुरानी सहेली सोनिया से होती है, जो अब एक सफल डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता बन चुकी है। सोनिया के प्रेरक संवाद पवलीन को जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का साहस देते हैं। अंततः पवलीन अपने जीवन को नए सिरे से जीने का निर्णय लेती है और सोनिया से मिलने फ्रांस जाने की तैयारी करती है।
नाटक में तीन कथावाचकों—‘का’, ‘हा’ और ‘नी’—के माध्यम से कहानी को रोचक अंदाज़ में आगे बढ़ाया गया। साथ ही कलाकारों की शरारती प्रस्तुतियों और मंचीय प्रयोगों ने हास्य और नाटकीयता का सुंदर माहौल तैयार किया।
लगभग 22 कलाकारों की इस प्रस्तुति में लाइव संगीत का भी प्रभावी प्रयोग किया गया। अधिकांश कलाकार पहली बार मंच पर उतरे, फिर भी उनके आत्मविश्वास और अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया। कलाकारों में रेया शर्मा, सिमरन, आकाशदीप सिंह, खुशबू वर्मा, कृतिका, गुरप्रीत सिंह, राजकरण सिंह, प्रियंका और विशेष राणा ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से सराहना बटोरी। कोरस में सोनिया कौर, अरमान विर्क, सुनीता जी और करिश ने सहयोग दिया।
नाटक के प्रोडक्शन कंट्रोलर लवलीन कौर रहीं। संगीत संयोजन में कीबोर्ड पर आर्यन, ताल पर शिवम गिल और गायिका जैस्मीन बराड़ की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।



