खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास हेतु हरिद्वार-उधम सिंह नगर में केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं के माध्यम से अवसंरचना को मिल रहा प्रोत्साहन- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने लोकसभा में सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सवाल उत्तराखंड में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तत्संबंधी ब्यौरे पर दिया जवाब
– खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के समग्र विकास हेतु खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) आकांक्षी जिलों और उत्तराखंड के हरिद्वार-उधम सिंह नगर सहित पूरे देश में दो केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं के माध्यम से संबंधित अवसंरचना की स्थापना/विस्तार को प्रोत्साहित कर रहा है
नई दिल्ली 13 मार्च। गुरुवार को लोकसभा में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सवाल उत्तराखंड में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तत्संबंधी ब्यौरे पर जवाब दिया।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने जवाब दिया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस एवं पंजीकरण) विनियम, 2011 के अनुसार खाद्य व्यवसायों को लाइसेंस/पंजीकरण जारी करता है। एफएसएसएआई ने दिनांक 05.03.2012 के आदेश के अनुसार खाद्य व्यवसाय संचालकों को वर्गीकृत किया है और इसका विवरण अनुबंध में दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 21 मार्च, 2025 के अनुसार, किसी उद्यम को निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम के रूप में वर्गीकृत किया गया है। जिसमें एक सूक्ष्म उद्यम, जहां संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश दो करोड़ पचास लाख रुपये से अधिक नहीं है और टर्नओवर दस करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। एक लघु उद्यम, जहाँ संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश पच्चीस करोड़ रुपये से अधिक नहीं है और टर्नओवर एक सौ करोड़ रुपये से अधिक नहीं है और एक मध्यम उद्यम, जहाँ संयंत्र और मशीनरी या उपकरण में निवेश एक सौ पच्चीस करोड़ रुपये से अधिक नहीं है और टर्नओवर पाँच सौ करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के समग्र विकास को बढ़ावा देने और सुनिश्चित करने के लिए, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) आकांक्षी जिलों और उत्तराखंड के हरिद्वार और उधम सिंह नगर सहित पूरे देश में अपनी दो केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) और केंद्र प्रायोजित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना के माध्यम से संबंधित अवसंरचना की स्थापना/विस्तार को प्रोत्साहित कर रहा है। ये योजनाएं किसी क्षेत्र या राज्य विशेष के लिए नहीं बल्कि मांग-आधारित हैं।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी एमओएफपीआई द्वारा कार्यान्वित योजनाओं के अंतर्गत सहायता के पात्र हैं। मध्यम एवं लघु परियोजनाओं के उद्यमियों तथा आकांक्षी जिलों के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए पीएमकेएसवाई की घटक योजना दिशानिर्देशों में निम्नलिखित अधिमान्य प्रावधान किए गए हैं- पात्र परियोजना लागत से संबंधित अंकन मानदंड हटा दिया गया है (पहले उच्च पात्र परियोजना लागत वाली परियोजनाओं को उच्च अंक प्राप्त करने का लाभ मिलता था जो मध्यम और लघु पैमाने की परियोजनाओं के लिए प्रतिकूल था)। नई संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संस्था के टर्नओवर के संबंध में अंकन मानदंड हटा दिया गया है। नीति आयोग द्वारा अधिसूचित आकांक्षी जिलों में प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए पांच अंक दिए जाते हैं । अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के अतिरिक्त स्माल इंडस्ट्रीज़ डेव्लपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) से परियोजना मूल्यांकन की अनुमति दी गई है ताकि एमएसएमई की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।
श्री रवनीत सिंह ने कहा- एमओएफपीआई ने उत्तराखंड में हरिद्वार और उधम सिंह नगर में निम्नलिखित परियोजनाओं को मंजूरी दी है- पीएमकेएसवाई- हरिद्वार जिले में 114.19 करोड़ रुपये के स्वीकृत अनुदान के साथ 10 परियोजनाएं, जिनमें से 8 परियोजनाएं चालू हैं और उधम सिंह नगर जिले में 303.44 करोड़ रुपये के स्वीकृत अनुदान के साथ 39 परियोजनाएं, जिनमें से 35 परियोजनाएं चालू हैं। पीएलआईएसएफपीआई- उधम सिंह नगर जिले में 116.05 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश के साथ 7 स्थानों पर खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं और सभी परियोजनाएं चालू हैं। पीएमएफएमई- हरिद्वार और उधम सिंह नगर ज़िले में 44 और 87 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए क्रमश: 1.98 करोड़ रुपये और 4.19 करोड़ रुपये की सब्सिडी के साथ ऋृण मंज़ूर किए गए हैं।


